यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 17, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
नोटबंदी पर आम राय- है थोड़ी परेशानी, मगर पटरी पर होगी 'जिंदगानी'
मुजफ्फरपुर के मुशहरी गांव के लोग नोटबंदी के लिए पीएम मोदी की सराहना कर रहे हैं। गांव के सभी लोगों ने कहा - आज परेशानी तो हो रही है लेकिन कल अच्छा होगा।

मुजफ्फरपुर [जेएनएन]। साहब! आषाढ़, सावन, भादो तीन महीना काम की कमी के कारण मंदी ही रहती है। परेशानी तब उठानी होती है। अभी तो कुछ नहीं। रोज कमाता हूं, रोज खाता हूं। अब जबकि प्रधानमंत्री ने बड़ा फैसला ले लिया, तो थोड़ी-बहुत परेशानी झेलने को हम तैयार हैं।
मुशहरी के हसनचक बंगरा गांव की अधिसंख्यक आबादी इस सोच के साथ थोड़ी-बहुत परेशानी को पीछे छोड़ अपनी दिनचर्या में लगी है। कुछ आबादी परेशान तो नहीं, मगर इस निर्णय से इत्तेफाक नहीं रखती।
गांव में बैंक नहीं। मगर, यहां के अधिसंख्यक लोगों के पास आज भी कमोबेश उतनी ही राशि है जितनी नोटबंदी के निर्णय से पहले थी। कारण, इनके पास छोटे नोट ही थे। थोड़ी-बहुत कमी उधार से चल जा रही। इस आशा में कि परेशानी बस थोड़े दिन की है। बाद में कुछ अच्छा होने वाला है।
नहीं लेते पांच सौ का नोट
मजदूरी के एवज में कई लोग बड़ा नोट देने की कोशिश कर रहे। इससे थोड़ी किचकिच हो रही। मगर, पहले से ही शर्त कि पांच सौ व हजार के नोट नहीं लेंगे। जब होगा तब दीजिए, लेकिन सौ के ही नोट लूंगा। कारपेंटर सुरेश शर्मा कहते हैं, चार सौ रुपये दिन के हिसाब से काम करता हूं। इसके बदले कोई पांच सौ का नोट देता है तो नहीं लेता।
गाय पालकर जीवन यापन करने वाली मिलन देवी को अभी कुछ दिन पैसे नहीं मिलेंगे। कारण, दूध खरीदने वाला कह गया कि नोट की परेशानी है। मगर, वह इससे समझौता करने को तैयार है। प्रभा देवी भी इस परेशानी को थोड़े समय का मानती हैं। आगे कुछ बेहतर होगा यह आशा है।
इन सबके बीच इम्तियाज अहमद पीएम के फैसले से इत्तेफाक नहीं रखते। उनके अनुसार पैसे वाले निश्चिंत हैं। उन्होंने उसकी व्यवस्था कर ली। गरीब व मध्यम वर्ग लाइन में लगा है। नईम अख्तर को अभी कोई परेशानी नहीं। मगर, वे मानते हैं कि निर्णय लेने में जल्दबाजी की गई।
कहते हैं, जिस घर में अचानक कोई बीमार हो जाता है परेशानी वहां होती। यह नहीं माना जा सकता कि कब किसकी तबीयत खराब हो जाए। वहीं शब्बीर अहमद पीएम के निर्णय के साथ हैं। कहते हैं, गरीबों को थोड़ी परेशानी है। मगर, बेचैनी बड़ों को है जो करोड़ों दबाए हैं। उन्हें आशा है कि आने वाले दिनों में महंगाई घटेगी। कई चीजें आमलोगों के पकड़ में होगी।

