यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 21, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
पता भी नहीं चलेगा और खाली हो जाएगा अापका बैंक अकाउंट, बरतें ये सावधानियां
साइबर क्राइम का लगातार बढता ग्राफ लोगों की मुश्किलों को लगातार बढ़ा रहा है। ठग रोज नए -नए तरीके इजाद कर रहे हैं। एेसे में सावधानी बरतना जरुरी है।

पटना [काजल]। साइबर क्रिमिनल्स की पहुंच अब ट्विटर से लेकर वेबसाइट्स तक हो गई है। देशभर में साइबर क्राइम का जाल तेजी से फैलता जा रहा है। अापको पता भी नहीं चलेगा और अापका बैंक अकाउंट खाली हो जाएगा। ठगी के लिएसाइबर क्रिमिनल्स रोज नए तरीके इजाद कर रहे हैं।
बिहार में भी साइबर क्राइम तेजी से बढ़ा रहा है। 2014 व 2015 में जहां क्रमश: 139 व 242 साइबर क्राइम दर्ज किये गये थे, वहीं इस साल के पहले तीन माह में ही 307 मामले दर्ज किये गये हैं।
पढ़ेंः उड़ी अटैकः शहादत से पहले की थी पत्नी से बात, अधूरा रहा दशहरा में आने का वादा
बिहार में साइबर क्राइम का आंकड़ा 15 महीने में चार गुना हो गया है। वर्ष 2014 में 139 मामले दर्ज हुए थे, जो अगले 15 महीनों (जनवरी, 2015 से मार्च, 2016 तक) में बढ़ कर 549 हो गया। इस तरह जहां वर्ष 2014 में प्रति माह करीब 11 मामले दर्ज हो रहे थे, वहीं अगले 15 महीने में यह आंकड़ा प्रति माह 37 तक पहुंच गया। खास बात यह है कि अधिकतर साइबर क्राइम मुंगेर, जमुई व बिहारशरीफ से लिंक हैं।
साइबर ठगों ने अब ठगी का नया तरीका इजाद कर लिया है। पहले ठग खुद को बैंक अधिकारी बता एटीएम का पिन नंबर पूछकर ठगी करते थे। अब ठग मोबाइल नंबर बंद करने का झांसा देकर दूसरे के मोबाइल नंबर से पेटीएम अकाउंट बना कर ठगी कर रहे हैं। इस नए तरीके ने पुलिस के लिए भी एक चुनौती पेश कर दी है कि वह किस तरह से इस हाईटेक और नए तरीके पर लगाम लगाए।
पढ़ेंः यूपी में भी नीतीश के ही नेतृत्व में होगा महागठबंधन, मिला नए दिग्गजों का साथ
अॉनलाइन वॉलेट का कर रहे इस्तेमाल
ऑनलाइन वाॅलेट का इस्तेमाल कर फर्जीवाड़े को अंजाम दे रहे हैं।आजकल देश के बड़े बैंक और कुछ निजी मोबाइल एप संचालक ऐसे वॉलेट को ग्राहकों को इस्तेमाल करने के लिए लुभा रहे हैं, जिसमें 10 हजार रुपये तक राशि को रखा जा सकता है। फर्जीवाड़ा गैंग इसी सहूलियत का बेजा फायदा उठा रहे हैं।

