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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 08, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

निखिल प्रियदर्शी की मुश्किलें बढ़ीं, अब एसबीआइ करेगी मुकदमा

By Ravi RanjanEdited By:
Updated: Sat, 08 Apr 2017 10:45 PM (IST)

पंजाब नेशनल बैंक के बाद अब एसबीआइ निखिल प्रियदर्शी के खिलाफ सीबीआइ में केस दर्ज कराने की तैयारी में है। निखिल और उसके भाई ने बैंक से 46 करोड़ रूपये का लोन ले रखा है।

निखिल प्रियदर्शी की मुश्किलें बढ़ीं, अब एसबीआइ करेगी मुकदमा
निखिल प्रियदर्शी की मुश्किलें बढ़ीं, अब एसबीआइ करेगी मुकदमा

पटना [जेएनएन]। बिहार में एक पूर्व मंत्री की बेटी से दुष्‍कर्म व सेक्‍स रैकेट संचालन के आरोपों में जेल में बंद ऑटोमोबाइल व्यवसायी निखिल प्रियदर्शी के खिलाफ भारतीय स्टेट बैंक भी सीबीआइ में केस दर्ज कराने की तैयारी में है। निखिल व उसके भाई मनीष प्रियदर्शी ने स्टेट बैंक से 46 करोड़ रुपये का लोन ले रखा है और इसकी किस्त चुकाना बंद कर दिया है।

पंजाब नेशनल बैंक ने भी निखिल, उसके बड़े भाई मनीष व रिटायर्ड आइएएस पिता कृष्ण बिहारी प्रसाद सिन्हा के खिलाफ बैंक के चार करोड़ रुपये हड़पने के मामले में सीबीआइ में पहले ही केस दर्ज करा रखा है।

दरअसल, निखिल प्रियदर्शी व उसके भाई मनीष प्रियदर्शी ने स्टेट बैंक से 46 करोड़, 53 लाख रुपये से भी अधिक का कर्ज ले रखा है। कर्ज न लौटाने के चलते दोनों के बैंक खाते एनपीए घोषित हैं। अब बैंक कर्ज की रकम लेते समय निखिल व उसके भाई द्वारा बैंक में जमा कराई गई गारंटी के संबंध में जांच कर रहा है। यहां तक कि जमानतदारों तक की संपत्ति की एसबीआइ ने जांच शुरू कर दी है।

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सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार निखिल प्रियदर्शी ने अपनी कंपनी प्रियदर्शी मोटर्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम से तथा मनीष प्रियदर्शी ने अपनी कंपनी पूर्णानंद ऑटोमोबाइल प्राइवेट लिमिटेड के नाम से एसबीआइ की डाकबंगला शाखा से वर्ष 2014 में 43.27 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। साथ ही दोनों भाइयों को बैंक ने 3.26 करोड़ रुपये का स्टैंडबाइ लाइन ऑफ क्रेडिट (एसएलसी) भी दे रखा था।

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दोनों भाइयों ने अपने व्यवसाय में बैंक के इस कर्ज का इस्तेमाल भी किया है। लेकिन बैंक को कर्ज वापस करना कुछ ही समय बाद बंद कर दिया। इस मामले में बैंक ने दोनों भाइयों को 16 मई, 2015 तथा 18 मई, 2016 को कर्ज नहीं लौटाए जाने के संबंध में दो-दो नोटिस भी जारी की लेकिन दोनों ने इसका कोई जवाब नहीं दिया। हालांकि यह मामला पटना हाईकोर्ट पहुंच चुका है। कोर्ट ने भी बैंक को आगे की कार्रवाई के लिए स्वतंत्र कर दिया है।

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