विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 08, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

अब क्‍या करेंगे केजरीवाल, HC ने 21 संसदीय सचिवों की नियुक्ति रद की

By JP YadavEdited By:
Published: Thu, 08 Sep 2016 12:12 PM (IST)Updated: Fri, 09 Sep 2016 08:59 AM (IST)

दिल्ली हाईकोर्ट ने आज केजरीवाल सरकार को तगड़ा झटका देते हुए अपने आदेश में तत्काल प्रभाव से 21 संसदीय सचिवों की नियुक्ति रद कर दी।

News Article Hero Image

नई दिल्ली (जेएनएन)। केजरीवाल सरकार को आम आदमी पार्टी के 21 विधायकों को संसदीय सचिव बनाने के मामले में बड़ा झटका लगा है। दिल्ली हाई कोर्ट ने आज दिल्ली सरकार द्वारा 21 संसदीय सचिवों की नियुक्ति को रद कर दिया।

अदालत ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि दिल्ली सरकार द्वारा संसदीय सचिवों की नियुक्तियां अवैध एवं असंवैधानिक है। कुछ दिन पूर्व दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार की एक याचिका पर उपराज्यपाल को दिल्ली का प्रमुख प्रशासक बताकर आप को करारा झटका दिया था।

दर्जनभर राज्यों में संसदीय सचिव बने सौ से ज्यादा विधायकों को लेकर है विवाद

दिल्ली सरकार ने 13 मार्च 2015 के अपने आदेश के जरिए पार्टी के 21 विधायकों को संसदीय सचिव बना दिया था। इस आदेश को अदालत में चुनौती दी गई थी। इससे पहले, दिल्ली सरकार द्वारा 21 विधायकों को संसदीय सचिव बनाए जाने के खिलाफ लगाई गई याचिका पर केंद्र सरकार ने अदालत के समक्ष अपनी स्थिति स्पष्ट की थी। केंद्र ने कहा कि कानून के मुताबिक दिल्ली में 21 संसदीय सचिव नहीं रखे जा सकते हैं। मौजूदा कानून में केवल एक संसदीय सचिव रखने का प्रावधान है, जो केवल मुख्यमंत्री के अंतर्गत काम करेगा।

यह है पूरा मामला

दरअसल, मार्च 2015 में दिल्ली सरकार ने 21 आम आदमी पार्टी विधायकों को संसदीय सचिव बनाया था। इसके खिलाफ प्रशांत पटेल नाम के शख्स ने राष्ट्रपति के पास याचिका लगाकर आरोप लगाया कि ये 21 विधायक लाभ के पद पर हैं, इसलिए इनकी सदस्यता रद होनी चाहिए।


AAP विधायक और 'लाभ का पद', क्या है मामला और किसने की थी शुरुआत

...तो इसलिए फंसा पेंच

13 मार्च, 2015 को दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने आम आदमी पार्टी के 21 विधायकों को मंत्रियों के संसदीय सचिव बनाने की घोषणा की और नोटिफिकेशन जारी कर दिया, जबकि अब तक दिल्ली में सीएम के संसदीय सचिव का पद ही हुआ करता था, मंत्रियों के संसदीय सचिव के पद नहीं थे।

संसदीय सचिवों की नियुक्ति पर हाई कोर्ट ने मांगा जवाब

24 जून, 2015 को केजरीवाल सरकार ने दिल्ली विधानसभा में कानून संशोधन करके मंत्रियों के संसदीय सचिव के पद को लाभ के पद से बाहर निकालने का प्रयास किया। 13 जून, 2016 को राष्ट्रपति ने इस बिल को ख़ारिज करके लौटा दिया।

केजरीवाल को लुधियाना पहुंचने पर दिखाए काले झंडे, महिलाओं ने फेंकीं चूड़ियां

इस बीच प्रशांत पटेल नाम के वकील ने राष्ट्रपति के पास एक याचिका दायर की, जिसमें शिकायत की गई कि आम आदमी पार्टी के 21 विधायक दिल्ली में लाभ के पद पर हैं इसलिए इनकी विधायकी रद हाेनी चाहिए। राष्ट्रपति ने ये याचिका चुनाव आयोग को भेजी और इस पर कार्रवाई करके रिपोर्ट देने को कहा।

संसदीय सचिव बने 21 AAP विधायकों ने EC को दिया जवाब

मार्च, 2016 में चुनाव आयोग ने 21 विधायकों को नोटिस भेजकर पूछा था कि आखिर वो कैसे लाभ के पद के दायरे में नहीं आते और क्यों उनकी विधायकी रद ना हो। 10, मई 2016 को 'आप' विधायकों ने अपना जवाब चुनाव आयोग को भेजा और बताया कि उन्होंने किसी तरह से कोई दफ़्तर, गाड़ी, वेतन भत्ता आदि सरकार से नहीं लिया, इसलिये वो लाभ के पद के दायरे में नहीं आते।

गुरु अन्ना की केजरीवाल को सलाह, सत्ता छोड़कर फिर से करें देशसेवा

विधानसभा में मिला हुआ है दफ़्तर

आम आदमी पार्टी के 21 विधायकों ने पहले दावा किया था कि उनको संसदीय सचिव के तौर पर कोई ऑफिस नहीं मिला है, लेकिन बाद में ये बात साफ़ हो गई कि विधायकों को संसदीय सचिव के तौर पर विधानसभा के अंदर दफ़्तर के लिए कमरे मिले थे। इस बात को विधानसभा रामनिवास गोयल ने माना और कहा कि हां कमरे उन्होंने ही दिए हैं, ये लाभ के पद के दायरे में नहीं आते क्योंकि ये सरकार ने नहीं विधानसभा ने दिए हैं।

यह है एक संसदीय सचिव रखने का प्रावधान

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश जी. रोहिणी और न्यायमूर्ति संगीता ढींगरा की खंडपीठ के समक्ष केंद्रीय गृह मंत्रालय की तरफ से पेश वकील जसमीत सिंह ने कहा था कि संसदीय सचिव के पद का जिक्र न तो भारत के संविधान में किया गया है और न ही दिल्ली विधानसभा सदस्य (अयोग्य घोषित करना) अधिनियम 1993 में इस बाबत कुछ कहा गया है। नियम के मुताबिक दिल्ली के मुख्यमंत्री को केवल एक संसदीय सचिव रखने का प्रावधान है। लिहाजा, दिल्ली सरकार के 13 मार्च 2015 के आदेश के अनुसार बनाए गए 21 संसदीय सचिव कानून के अंतर्गत नहीं आते हैं।

AAP के 21 संसदीय सचिव
1. जरनैल सिंह, राजौरी गार्डन
2. जरनैल सिंह, तिलक नगर
3. नरेश यादव, मेहरौली
4. अल्का लांबा, चांदनी चौक
5. प्रवीण कुमार, जंगपुरा
6. राजेश ऋषि, जनकपुरी
7. राजेश गुप्ता, वज़ीरपुर
8. मदन लाल, कस्तूरबा नगर
9. विजेंद्र गर्ग, राजिंदर नगर
10. अवतार सिंह, कालकाजी
11. शरद चौहान, नरेला
12. सरिता सिंह, रोहताश नगर
13. संजीव झा, बुराड़ी
14. सोम दत्त, सदर बाज़ार
15. शिव चरण गोयल, मोती नगर
16. अनिल कुमार बाजपई, गांधी नगर
17. मनोज कुमार, कोंडली
18. नितिन त्यागी, लक्ष्मी नगर
19. सुखबीर दलाल, मुंडका
20. कैलाश गहलोत, नजफ़गढ़
21. आदर्श शास्त्री, द्वारका

क्या 21 नेताओं की विधायकी जाएगी ?
1- संविधान मामलों के एक्सपर्ट सुभाष कश्यप बताते हैं कि संसदीय सचिवों की नियुक्ति में दिल्ली सरकार ने एलजी से मंजूरी नहीं ली थी। इसलिए कोर्ट ने नियुक्तियों को रद किया है। हालांकि, अभी इनकी विधानसभा सदस्यता नहीं गई है क्योंकि दिल्ली हाई कोर्ट और इलेक्शन कमीशन को यह फैसला लेना है कि संसदीय सचिव का पद ऑफिस ऑफ प्राफिट के दायरे में आता है या नहीं ?

2- कश्यप बताते हैं कि संविधान को जितना मैंने समझा है, उस हिसाब से ये पद ऑफिस ऑफ प्राफिट के दायरे में आता है। मेरी राय में इन 21 विधायकों की सदस्यता को पूरा खतरा है।

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।