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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 22, 2012 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

वजन को लेकर चिंतित रहती हैं जोहरा सहगल

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Updated: Sun, 22 Apr 2012 03:40 PM (IST)

प्रसिद्ध नृत्यांगना और अपने जमाने की मशहूर अभिनेत्री जोहरा सहगल 27 अप्रैल को 100 साल की हो जाएंगी। इस मौके पर उनकी बेटी किरण सहगल अपनी मां को एक विशेष ...और पढ़ें

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मुंबई। प्रसिद्ध नृत्यांगना और अपने जमाने की मशहूर अभिनेत्री जोहरा सहगल 27 अप्रैल को 100 साल की हो जाएंगी। इस मौके पर उनकी बेटी किरण सहगल अपनी मां को एक विशेष उपहार देने की तैयारी में हैं। किरण ने अपनी मां के जीवन पर एक किताब लिखी है जोहरा सहगल फैटी। इस किताब में किरण ने एक सख्त मिजाज और अपने वजन को लेकर हमेशा चिंतित रहने वाली मां के बारे में बताया है।

कुछ दिनों पहले 67 वर्षीय किरण (प्रख्यात ओडि़शी नृत्यांगना) ने अपनी मां को उनकी जीवनी का कवर पेज दिखाया, जिस पर लिखा था जोहरा सहगल फैटी। दरअसल किरण इस शीर्षक पर अपनी मां की प्रतिक्रिया जानना चाहती थीं। यह देखते ही जोहरा ने तपाक से कहा, तुमने प्रकाशक से फैटी के साथ हिटलर लिखने को क्यों नहीं कहा। इतना कहकर वह खिलखिला पड़ीं।

जोहरा का असली नाम साहिबजादी जोहरा बेगम मुमताजुल्ला खान है। उनका जन्म 27 अप्रैल, 1912 को उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के रोहिल्ला पठान परिवार में हुआ। वह मुमताजुल्ला खान और नातीक बेगम की सात में से तीसरी संतान हैं। हालांकि जोहरा का पालन-पोषण सुन्नी मुस्लिम परंपराओं में हुआ, लेकिन वह बचपन से ही विद्रोह मानसिकता की थीं।

लाहौर से स्कूली शिक्षा और स्नातक करने के बाद जोहरा अपने मामा के साथ जर्मनी चली गई। वहां उन्होंने खुद को बुर्के से आजाद कर लिया और संगीत की शिक्षा ली। वर्ष 1935 में जोहरा जाने-माने नर्तक उदय शंकर से मिलीं और उनके डांस ग्रुप का हिस्सा बन कर पूरी दुनिया घूमीं।

1940 में अल्मोड़ा स्थित शंकर के स्कूल में नृत्य की शिक्षा देने के साथ ही उनकी मुलाकात कामेश्वर से हुई, जिनसे जोहरा ने 1942 में शादी की। फिर उन्होंने मुंबई आकर पृथ्वी थियेटर में नृत्य निर्देशक के रूप में काम करना शुरू किया, जहां वह अपनी सख्त मिजाजी के लिए जानी जाती थीं। यहीं से उनका फिल्मों का सफर भी शुरू हो गया। बॉलीवुड की सुपरहिट फिल्म हम दिल दे चुके सनम, कभी खुशी कभी कम, चीनी कम जैसे कई फिल्मों में काम किया।

फिल्मी सफर की दास्तान

-वर्ष 1945 में पृथ्वी थियेटर में 400 रुपये मासिक वेतन पर काम शुरू किया। इसी दौरान इप्टा ग्रुप में शामिल हुई।

-वर्ष 1946 में ख्वाजा अहमद अब्बास के निर्देशन में धरती के लाल और चेतन आनंद की फिल्म नीचा सागर में काम किया।

-धरती के लाल भारत की पहली फिल्म थी, जिसे कान फिल्म समारोह में गोल्डन पाम पुरस्कार मिला।

-मुंबई में जोहरा ने इब्राहीम अल्काजी के प्रसिद्ध नाटक दिन के अंधेरे में बेगम कुदसिया की भूमिका निभाई।

-गुरुदत्त की वर्ष 1951 में आई फिल्म बाजी तथा राजकपूर की फिल्म आवारा के प्रसिद्ध स्वप्न गीत की कोरियोग्राफी भी की।

-1964 में बीबीसी पर रुडयार्ड किपलिंग की कहानी में काम करने के साथ ही 1976-77 में बीबीसी की टेलीविजन श्रृंखला पड़ोसी नेबर्स की 26 कडि़यों में प्रस्तोता की भूमिका निभाई।

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