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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 28, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

बर्थडे: हिंदी सिनेमा के पहले सुपर स्टार राजेश खन्ना की कुछ अनसुनी कहानियां!

By Hirendra JEdited By:
Published: Wed, 28 Dec 2016 06:23 PM (IST)Updated: Thu, 29 Dec 2016 11:11 AM (IST)

राजेश खन्ना रोज़ रोज़ पैदा नहीं लेते। तमाम असहमतियों के बावजूद यह एक स्थापित सत्य है कि राजेश खन्ना हिंदी सिनेमा के पहले सुपरस्टार हैं...

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मुंबई। आज राजेश खन्ना की बर्थ एनिवर्सरी है। आज वो हम सबके बीच होते तो अपना 77 वां जन्मदिन मना रहे होते। दूसरी बात यह भी है कि वो हमारे बीच नहीं हैं पर अपनी फ़िल्मों और निभाए गए अपने किरदारों से हमेशा अपने चाहने वालों के बीच वो बने रहेंगे। जी, 'आनंद' मरा नहीं करते!

राजेश खन्ना की अभिनय के सब कायल थे। उनका वास्तविक नाम जतिन खन्ना था। अपने अंकल के कहने पर उन्होंने नाम अपना नाम बदल कर राजेश खन्ना कर लिया। 1969 से 1975 के बीच राजेश ने कई सुपरहिट फिल्में दीं। उनका करिश्मा कुछ ऐसा था कि उस दौर में पैदा हुए ज्यादातर लड़कों के नाम राजेश रखे गए। फ़िल्म इंडस्ट्री में राजेश को प्यार से काका कहा जाता था। जब वे सुपरस्टार थे तब एक कहावत बड़ी मशहूर थी- ऊपर आका और नीचे काका। क्या आप जानते हैं जब राजेश खन्ना फ़िल्म में काम पाने के लिए निर्माताओं के दफ्तर के चक्कर लगाने शुरू किये, एक स्ट्रगलर होने के बावजूद वे इतनी महंगी कार में निर्माताओं के पास जाते थे कि उस दौर के हीरो के पास भी वैसी कार नहीं हुआ करती थी। बहरहाल, बाद में उनके स्टारडम के दिन भी शुरू हुए। लड़कियों के बीच राजेश खन्ना बेहद लोकप्रिय थे। लड़कियों ने उन्हें खून से खत लिखे। उनकी फोटो से शादी तक कर ली। कई लड़कियां उनका फोटो तकिये के नीचे रखकर सोती थी। स्टुडियो या किसी निर्माता के दफ्तर के बाहर राजेश खन्ना की सफेद रंग की कार रुकती थी तो लड़कियां उस कार को ही चूम लेती थी। लिपिस्टिक के निशान से सफेद रंग की कार गुलाबी हो जाया करती थी।

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निर्माता-निर्देशक राजेश खन्ना के घर के बाहर लाइन लगाए खड़े रहते थे। वे मुंहमांगे दाम चुकाकर उन्हें साइन करना चाहते थे। पाइल्स के ऑपरेशन के लिए एक बार राजेश खन्ना को अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। अस्पताल में उनके इर्द गिर्द के कमरे निर्माताओं ने बुक करा लिए ताकि मौका मिलते ही वे राजेश को अपनी फ़िल्मों की कहानी सुना सके। राजेश खन्ना को रोमांटिक हीरो के रूप में बेहद पसंद किया गया। उनकी आंख झपकाने और गर्दन टेढ़ी करने की अदा के लोग दीवाने हो गए। राजेश खन्ना द्वारा पहने गए कुर्त्ते खूब प्रसिद्ध हुए और कई लोगों ने उनके जैसे कुर्त्ते पहने। 'आराधना', 'सच्चा झूठा', 'कटी पतंग', 'हाथी मेरे साथी', 'महबूब की मेहंदी', 'आनंद', 'आन मिलो सजना', 'आपकी कसम' जैसी फ़िल्मों ने कमाई के नए रिकॉर्ड बनाए। 'आराधना' फ़िल्म का गाना ‘मेरे सपनों की रानी कब आएगी तू...’ उनके कैरियर का सबसे बड़ा हिट गीत रहा। 'आनंद' राजेश खन्ना के कैरियर की सर्वश्रेष्ठ फिल्म मानी जा सकती है, इसमें उन्होंने कैंसर से ग्रस्त जिंदादिल युवक की भूमिका निभाई।

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राजेश खन्ना की सफलता के पीछे संगीतकार आरडी बर्मन और गायक किशोर कुमार का भी अहम योगदान रहा। इस तिकड़ी के अधिकांश गीत हिट साबित हुए और आज भी सुने जाते हैं। किशोर ने 91 फ़िल्मों में राजेश को आवाज दी तो आरडी ने उनकी 40 फ़िल्मों में संगीत दिया। अपनी फ़िल्मों के संगीत को लेकर राजेश हमेशा सजग रहते थे। वे गाने की रिकॉर्डिंग के वक्त स्टुडियो में रहना पसंद करते थे और अपने सुझावों से संगीत निर्देशकों को अवगत कराते थे। मुमताज और शर्मिला टैगोर के साथ राजेश खन्ना की जोड़ी को काफी पसंद किया गया। मुमताज के साथ उन्होंने 8 सुपरहिट फ़िल्में दी।

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रोमांटिक हीरो राजेश दिल के मामले में भी रोमांटिक रहे। अंजू महेन्द्रू से उनके अफेयर के किस्से सरे आम थे।लेकिन, फिर उनसे उनका ब्रेकअप हो गया। ब्रेकअप की वजह दोनों ने कभी नहीं बताई। बाद में अंजू ने क्रिकेट खिलाड़ी गैरी सोबर्स से सगाई कर सभी को चौंका दिया। इसके बाद राजेश खन्ना ने अचानक डिम्पल कपाड़िया से शादी कर करोड़ों लड़कियों के दिल तोड़ दिए। डिम्पल ने 'बॉबी' फ़िल्म से सनसनी फैला दी थी। हुआ यह था कि एक दिन समुंदर किनारे चांदनी रात में डिम्पल और राजेश साथ घूम रहे थे। अचानक उस दौर के सुपरस्टार राजेश ने कमसिन डिम्पल के आगे शादी का प्रस्ताव रख दिया जिसे डिम्पल ठुकरा नहीं पाईं। शादी के वक्त डिम्पल की उम्र राजेश से लगभग आधी थी। राजेश-डिम्पल की शादी की एक छोटी-सी फ़िल्म उस समय देश भर के थिएटर्स में फ़िल्म शुरू होने के पहले दिखाई गई थी। लोग, उनकी शादी की फ़िल्म देखने सिनेमा हॉल में खिंचे चले जाते। बहुत बाद में वो तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कहने पर राजनीति में भी आए। कांग्रेस की तरफ से कुछ चुनाव भी उन्होंने लड़े। जीते भी और हारे भी। लालकृष्ण आडवाणी को उन्होंने चुनाव में कड़ी टक्कर दी और शत्रुघ्न सिन्हा को हराया भी। बाद में उनका राजनीति से मोहभंग हो गया। राजेश खन्ना की लाइफ में टीना मुनीम भी आईं। एक जमाने में राजेश ने कहा भी था कि वे और टीना एक ही टूथब्रश का इस्तेमाल करते हैं।

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राजेश खन्ना और उनकी बेटी ट्विंकल का एक ही दिन जन्मदिन आता है, 29 दिसंबर को। बहुत पहले ‘जय शिव शंकर’ फिल्म में काम मांगने के लिए राजेश खन्ना के ऑफिस में अक्षय कुमार गए थे। घंटों उन्हें बिठाए रखा और बाद में काका उनसे नहीं मिले। उस दिन कोई सोच भी नहीं सकता था कि यही अक्षय एक दिन काका के दामाद बनेंगे। कहा जाता है कि राजेश खन्ना ने बहुत सारा पैसा लॉटरी चलाने वाली एक कंपनी में लगा रखा था जिसके जरिये उन्हें बहुत आमदनी होती थी। काका का कहना था कि वे अपनी ज़िन्दगी से बेहद खुश थे। दोबारा मौका मिला तो वे फिर राजेश खन्ना बनना चाहेंगे और वही गलतियां दोहराएंगे। राजेश खन्ना रोज़ रोज़ पैदा नहीं लेते। तमाम असहमतियों के बावजूद यह एक स्थापित सत्य है कि राजेश खन्ना हिंदी सिनेमा के पहले सुपरस्टार हैं।

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