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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 17, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

तोल-मोल के बोल खरीदारी में

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Updated: Thu, 17 Oct 2013 01:05 PM (IST)

मोल-भाव का अपना अलग ही मजा होता है। लोग ऐसा क्यों करते हैं, मोल-भाव करना क्या वाकई फायदेमंद होता है और इसका सही तरीका क्या होना चाहिए, इन्हीं सवालों के जवाब ढूंढने की कोशिश की गई है यहां।

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मोल-भाव का अपना अलग ही मजा होता है। लोग ऐसा क्यों करते हैं, मोल-भाव करना क्या वाकई फायदेमंद होता है और इसका सही तरीका क्या होना चाहिए, इन्हीं सवालों के जवाब ढूंढने की कोशिश की गई है यहां।

सही दाम बोलो? 'नहीं मैडम, साढ़े पांच सौ रुपये से एक पैसा भी कम नहीं हो सकता।'

'अरे! क्या बात करते हो दो दिन पहले ही मैं यहां से तीन सौ रुपये में बिलकुल ऐसा ही पर्स ले गई थी।'

'नहीं, आपने कहीं और से खरीदा होगा।'

'भइया मैं वर्षो से तुम्हारे यहां से समान खरीदती आ रही हूं, कुछ तो खयाल करो।'

'अच्छा 490 में ले जाओ',

'नहीं, नहीं कम से कम 350 में दे दो',

'अच्छा चलो, न आपकी, न मेरी बात। 450 में ले जाओ।'

'रहने दो, नहीं चाहिए,' यह कहते हुए जब वह युवती आगे बढ़ जाती है तो दुकानदार पीछे से आवाज लगाता है, 'अरे बात तो सुनो मैडम, नाराज क्यों होती हो? चलो आपके कहने पर चार सौ में दे देता हूं।' इस तरह सौदा पक्का हो जाता है। चाहे वह दिल्ली का सरोजिनी नगर मार्केट हो या मुंबई का लिंकिंग रोड, यह दृश्य किसी भी बाजार में आसानी से देखा जा सकता है। इससे खरीदने और बेचने वाले दोनों ही खुश हैं।

खरीदार यह सोचकर ख़ुश है कि उसे साढ़े पांच सौ की चीज चार सौ में मिल गई और दुकानदार यह सोच रहा है कि चलो अच्छा हुआ, 100 रुपये में खरीदकर कम से कम तीन सौ का मुनाफा तो कमाया।

मिलती है बचत की संतुष्टि

हर इंसान यह सोचकर खुश होता है कि मैंने दुकानदार से इतने रुपये कम करवा लिए, लेकिन आपको यह नहीं भूलना चाहिए कि दुकानदार कभी भी नुकसान उठाकर सामान नहीं बेचेगा। मोल-भाव में यकीन रखने वाले लोग निश्चित कीमत वाली दुकानों से सामान खरीदना पसंद नहीं करते क्योंकि वहां से सामान खरीदने के बाद वे 'मैंने 200 रुपये बचा लिए', के सुखद एहसास से वंचित रह जाते हैं। साथ ही ग्राहक हमेशा इस बात को लेकर सचेत रहता है कि मैं ठगा न जाऊं। इसलिए लोग मोल-भाव को अपना जन्मसिद्ध अधिकार मानते हैं। उन्हें दुकानदारों से इस तरह का रोचक और सरस वार्तालाप करना अच्छा लगता है। इस बातचीत का भी अपना अलग ही अंदाज होता है। मोल-भाव करने वाले खरीदार अपने मजबूत इरादे और धैर्य का परिचय देते हुए अपनी बात पर अडिग रहते हैं।

दिल्ली की 42 वर्षीया लता अग्रवाल पेशे से शिक्षिका हैं और वह कहती हैं, 'मैं बार्गेनिंग में माहिर हूं और मुझे ऐसी शॉपिंग करने में बहुत मजा आता है। जब भी मेरी कलीग्स शापिंग के लिए जनपथ या सरोजिनी नगर जाती हैं तो मुझे अपने साथ जरूर ले जाती हैं।'

इस संबंध में मनोवैज्ञानिक डॉ.अशुम गुप्ता कहती हैं, 'हमेशा अपने फायदे के बारे में सोचना सहज मानवीय प्रवृलि है। इसीलिए लोगों को मोल-भाव करना अच्छा लगता है। अब तक किए गए अनुसंधानों से यह साबित हो चुका है कि पुरुषों की तुलना में स्त्रियां ज्यादा अच्छी तरह मोल-भाव करती हैं क्योंकि उन पर गृहस्थी चलाने की जिम्मेदारी होती है और वे हमेशा बचत करना चाहती हैं।'

तसवीर का दूसरा रुख

मोल-भाव के बारे में दुकानदारों का सोचना बिलकुल अलग होता है। दिल्ली के जनपथ मार्केट में टी श‌र्ट्स बेचने वाले संजय नागर कहते हैं, 'मैं पिछले सात वर्षो से यहां दुकान लगा रहा हूं। चाहे हम कितना ही सस्ता सामान क्यों न बेचें, लेकिन ग्राहकों को हमेशा यही महसूस होता है कि हम उनसे ज्यादा कीमत वसूल रहे हैं। वे हमसे दाम कम कराए बिना नहीं मानते। इसीलिए हमें मजबूरी में अपने मुनाफेका मार्जिन रखकर चलना पड़ता है, ताकि हमारे ग्राहकों की बातों का मान भी रह जाए और हमें कोई नुकसान भी न हो। मोल-भाव के बहाने हमारी भी बोरियत दूर हो जाती है और ग्राहकों के साथ अपनत्व भरा रिश्ता कायम होता है। अगर कोई व्यक्ति ज्यादा मोल-भाव नहीं कर पाता तो हमारा फायदा हो जाता है और कभी कोई हमसे कीमत कम करवाने में कामयाब हो जाता है तो हमें उतना फायदा नहीं हो पाता। फिर भी हमारे मुनाफेका बैलेंस बना रहता है। वैसे, लेडीज बहुत ज्यादा बार्गेनिंग करती हैं। इसलिए हम उन्हें पहले से ही ज्यादा कीमत बताते हैं।'

विशेषज्ञ की राय

अच्छी तरह मोल-भाव कर पाना हर इंसान के वश की बात नहीं है, क्योंकि यह सामाजिक व्यवहार का बहुत अहम हिस्सा है। इस संबंध में दिल्ली विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ होम इकोनॉमिक्स की डायरेक्टर डॉ. कुमुद खन्ना आपको दे रही हैं, कुछ सुझाव।

1. मोल-भाव करने का पहला उसूल है कि आपकी बातचीत की शैली बेहद प्रभावशाली और अपनत्व भरी होनी चाहिए। तभी आप दुकानदार से अपनी बात मनवाने में सफल होंगे।

2. दुकानदार ग्राहकों के चेहरे का हाव-भाव पढ़ने की कला में माहिर होते हैं। इसलिए कोई भी सामान खरीदते समय दुकानदार के सामने यह जाहिर न होने दें कि कोई खास चीज आपको बहुत ज्यादा पसंद आ गई है या इसी चीज को आप बहुत देर से तलाश रहे थे। ऐसे में दुकानदार आपकी जरूरत का फायदा उठाते हुए उसकी कीमत कम नहीं करेगा। 3. मोल-भाव का सारा मामला इस बात पर टिका होता है कि किसके पास ज्यादा धैर्य है, अगर आपने किसी चीज की कीमत कम करने को कहा है तो कुछ देर तक अपनी बात पर टिके रहें। इससे दुकानदार खुद कीमत घटाने लगेगा।

4. जिन दुकानों में मोल-भाव होता है, वहां अकसर ठगे जाने का भी खतरा रहता है। इसलिए ऐसी मार्केट से खरीदारी करते वक्त सामान की क्वॉलिटी और एक्सपायरी डेट आदि का पूरा ध्यान रखें और बहुत जांच-परख कर सामान खरीदें।

5. आप सचमुच जितनी कीमत पर सामान खरीदना चाहते हैं, दुकानदार से उससे भी थोड़ी कम कीमत में सामान देने को कहें क्योंकि आप जितने मूल्य पर सामान की मांग करेंगे, दुकानदार उस कीमत पर कभी भी सामान बेचना नहीं चाहेगा। इस तरह दुकानदार जब अपने निर्धारित मूल्य से थोड़ा नीचे आएगा और आप भी अपने लिए मांगी गई कीमत से थोड़ा ऊपर आएंगे तो तभी बीच में एक ऐसी अवस्था आती है, जब एक निश्चित कीमत पर दुकानदार और खरीदार दोनों की सहमति हो जाती है।

6. मोल-भाव वाले बाजारों में भीड़ बहुत ज्यादा होती है, अत: वहां सही समय पर पहुंचने की कोशिश करें, इससे आप तसल्ली से अच्छे सामान का चुनाव कर पाएंगे। इसका एक फायदा यह भी होता है कि आम तौर पर दुकानदार अपने पहले ग्राहक को कभी भी वापस नहीं लौटाते। इसलिए वहां मोल-भाव करने पर आपको मनचाही कीमत पर सामान मिल सकता है।

7. अगर संभव हो तो शॉपिंग के लिए अपने साथ किसी ऐसे दोस्त या रिश्तेदार को लेकर जाएं, जो मोल-भाव की कला में माहिर हो।

8. आप शॉपिंग के शौकीन हैं तो दोस्तों की मदद से अपने लिए ऐसी दुकानें और बाजार तलाशें, जहां मोल-भाव के जरिये अच्छा सामान मिलता हो।

9. बाजार और कीमतों के बारे में जागरूक रहें। अपने परिचितों से इस विषय पर हमेशा बातचीत करें। जब भी कोई सामान खरीदें तो अपनी शॉपिंग के अनुभव दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें। इससे मोल-भाव के संबंध में आपको कई नई जानकारियां मिलेंगी।

10. फिर भी अगर आपको ऐसा लगता है कि आप अच्छी तरह मोल-भाव नहीं कर सकते तो आपको हमेशा फिक्स्ड प्राइस वाली दुकानों से ही सामान खरीदना चाहिए।

बार्गेनिंग विदेश में

अकसर लोगों के मन में इस बात की उत्सुकता रहती है कि क्या दूसरे देशों में भी हमारे देश की तरह मोल-भाव होता है। यही जानने के लिए हमने कुछ ऐसे लोगों से बात की, जिन्हें विदेशी बाजारो में खरीदारी का अनुभव रहा है:

बैंकॉक की नाइट मार्केट में बहुत सस्ती चीजें मिलती हैं और वहां भारत की ही तरह जबरदस्त मोल-भाव होता है। दुकानदार किसी विदेशी टूरिस्ट को देखते ही कीमत और अधिक बढ़ाकर बताते हैं। इसलिए वहां खरीदारी करते समय बहुत सतर्क रहना चाहिए। एक बार वहां से मैंने दो घडि़यां खरीदीं, जल्दबाजी में एक को चलवा कर चेक करना भूल गई। दिल्ली आने के बाद जब मैं उसे वॉच रिेपेयरिंग शॉप में ले गई तो दुकानदार ने घड़ी खोल कर दिखाते हुए कहा कि 'इसके भीतर कुछ भी नहीं है, तो यह चलेगी कहां से?

कविता शर्मा, चार्टर्ड एकाउंटेंट

लंदन में बहुत कम बार्गेनिंग देखने को मिलती है। वहां के हैंगर लेन और चाइना टाउन मार्केट में थोड़ी-बहुत बार्गेनिंग चलती है। स्पेन केबार्सिलोना शहर में भी कुछ टूरिस्ट शॉप ऐसे हैं, जहां मोल-भाव करके सामान खरीदा जा सकता है।

ज्योति प्रियदर्शी, अनिवासी भारतीय

दो वर्ष पहले मैं अपनी बेटी के पास पेरिस गई थी। वहां के फ्ली मार्केट में मोल-भाव करके अच्छी चीजें मिल जाती हैं।

गायत्री मिश्रा, गृहिणी

मुझे दो बार इजिप्ट जाने का मौका मिला। वहां काटूरिस्ट मार्केट देखकर मुझे भारत के जनपथ की याद आ गई। वहां भी दुकानदार राह चलते लोगों को बड़े प्यार से बुला-बुला कर सामान बेचते नजर आते हैं, लेकिन वहां काफी मोल-भाव करने की जरूरत होती है। वर्ना, आप ठगे जाएंगे।

सुबोध सिंह, आई.टी. प्रोफेशनल

विनीता

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