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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 24, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

जल्द टाटा के विमान में बैठकर सफर करेंगे आप

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Updated: Mon, 30 Mar 2015 06:40 PM (IST)

सरकार ने आज ने टाटा संस और सिंगापुर एयरलाइंस के संयुक्त उद्यम को मंजूरी दे दी है। एफआईपीबी ने टाटा-सिंगापुर एयरलाइंस के 4.

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नई दिल्ली। सरकार ने आज ने टाटा संस और सिंगापुर एयरलाइंस के संयुक्त उद्यम को मंजूरी दे दी है। एफआईपीबी ने टाटा-सिंगापुर एयरलाइंस के 4.9 करोड़ डॉलर के एफडीआई प्रस्ताव को हरी झंडी दिखा दी।

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आर्थिक मामलों के सचिव अरविंद मायाराम ने एफआईपीबी के साथ हुई बैठक के बाद कहा कि इसे (टाटा-एसआईए) प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। मायाराम ने कहा कि संयुक्त उद्यम के लिए कोई राइडर तय नहीं किया गया है। इस करार में सिंगापुर एयरलाइंस की 49 फीसद और टाटा संस की 51 फीसद हिस्सेदारी होगी। टाटा संस की नई एयरलाइन दिल्ली से कारोबार करेगी। एयरलाइन के बोर्ड पर टाटा समूह के 2 सदस्य और सिंगापुर एयरलाइंस का 1 सदस्य होगा।

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नई एयरलाइन के चेयरमैन प्रसाद मेनन होंगे। बोर्ड में प्रसाद मेनन के अलावा मुकुंद राजन और मैक स्वी वा भी शामिल होंगे। वहीं, टाटा संस पहले ही मलेशिया की एयर एशिया के साथ सस्ती एयरलाइन शुरू करने के लिए करार कर चुका है। इस संयुक्त उद्यम में एयर एशिया का 49 फीसद और टाटा संस का 30 फीसद हिस्सा है। एफआईपीबी इसे मंजूरी दे चुका है।

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कहा जा रहा है कि टाटा और सिंगापुर एयरलाइंस शुरुआती दौर में 10 करोड़ डॉलर का निवेश कर एयरलाइंस लॉन्च करेंगे। सभी प्रकार की मंजूरी मिलने के बाद अगले साल टाटा उड़ान भरने को तैयार हो जाएगा। गौरतलब है कि नागर विमानन क्षेत्र के उतरने के लिए टाटा संस और सिंगापुर एयरलाइंस की यह तीसरी कोशिश है। वैसे टाटा और विमानन क्षेत्र का संबंध काफी पुराना है। जेआरडी टाटा ने टाटा एयरलाइंस की शुरुआत 1932 में की थी। 1946 में इसका नाम बदल कर एयर इंडिया रखा गया और 1953 में इसका राष्ट्रीयकरण कर दिया गया।