यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 15, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
निर्यात प्रोत्साहन के लिए बदले एसईजेड नियम
नई दिल्ली। निर्यात की रफ्तार बढ़ाने को रियायतों के साथ सरकार विशेष आर्थिक जोन (एसईजेड) में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए भी कदम उठा रही है। अब तक अ ...और पढ़ें

नई दिल्ली। निर्यात की रफ्तार बढ़ाने को रियायतों के साथ सरकार विशेष आर्थिक जोन (एसईजेड) में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए भी कदम उठा रही है। अब तक अर्थव्यवस्था में अपना मजबूत स्थान बना पाने में नाकाम रहे एसईजेड के नियमों को सरकार ने और लचीला बना दिया है। इसके लिए न केवल एसईजेड के आकार की न्यूनतम सीमा को घटाया है, बल्कि निर्माण क्षेत्र की सीमा में भी रियायत दी है।
वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय की इसी महीने जारी हुई अधिसूचना के मुताबिक अब एसईजेड की स्थापना के लिए न्यूनतम एक हजार हेक्टेयर की सीमा को घटाकर पांच सौ हेक्टेयर कर दिया गया है। आइटी और इससे जुड़ी सेवाओं के विशेष आर्थिक जोन स्थापित करने के लिए जमीन की न्यूनतम सीमा लागू नहीं होगी। लेकिन न्यूनतम निर्मित क्षेत्र की सीमा लागू रहेगी। ए श्रेणी के शहरों में यह सीमा एक लाख वर्गमीटर की होगी तो बी श्रेणी में 50 हजार वर्गमीटर न्यूनतम निर्मित क्षेत्र रखना होगा। सी श्रेणी के शहरों में यह सीमा 25 हजार वर्गमीटर की होगी।
रत्न व आभूषण क्षेत्र के लिए भी एसईजेड स्थापित करने के लिए अब न्यूनतम 50 हजार वर्गमीटर क्षेत्र की जरूरत होगी। कई राज्यों जैसे हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, सिक्किम, असम, मेघालय, नगालैंड, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, मणिपुर, त्रिपुरा, गोवा व किसी संघ शासित प्रदेश में इस क्षेत्र के लिए 25 हजार वर्गमीटर में ही एसईजेड स्थापित किया जा सकेगा।
