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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 30, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    'एक देश, एक टैक्स' से मिटेगा भ्रष्टाचार: अरुण जेटली

    By Kishor JoshiEdited By:
    Updated: Sun, 31 Jul 2016 06:42 AM (IST)

    केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने एक बार फिर से जीएसटी की वकालत करते हुए कहा है कि इसके लागू होने से देश में भ्रष्टाचार मिटेगा। ...और पढ़ें

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    नई दिल्ली (प्रेट्र)। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने जीएसटी बिल की फिर से जोरदार पैरवी की है। इसकी अहमियत पर जोर देते हुए उन्होंने कहा है कि 'एक देश, एक टैक्स' प्रणाली से कराधान के स्तर कम होंगे और भ्रष्टाचार मिटेगा। वर्षो से लंबित वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) विधेयक को पारित कराने की सरकार की नए सिरे से जारी कोशिशों के बीच वित्त मंत्री का यह बयान आया है।

    जेटली यहां इंडिया इस्लामिक कल्चर सेंटर में डॉ एपीजे अब्दुल कलाम स्मृति व्याख्यान में पहुंचे थे। वह बोले कि भारत ऐसी अप्रत्यक्ष कर प्रणाली को बर्दाश्त नहीं कर सकता जहां हर बिंदु पर टैक्स लगे। वह आज पूर्व में हुए स्पेक्ट्रम या कोयला खान विवादों को भी झेलने के लिए तैयार नहीं है। एक देश एक टैक्स का विचार बेहद महत्वपूर्ण है। करों के स्तर कम करने के लिए ही नहीं, बल्कि व्यापार सुगमता उपलब्ध कराने और भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए भी यह जरूरी है।

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    प्रस्तावित जीएसटी में लगभग सभी तरह के अप्रत्यक्ष कर समाहित हो जाएंगे। सरकार जीएसटी के लिए संविधान संशोधन विधेयक को अगले सप्ताह राज्यसभा में पारित करवाना चाहती है।

    वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि भारत को सभी तरह के निवेश की जरूरत है। निजी क्षेत्र से निवेश तभी आएगा जब भारत श्रेष्ठ निवेश गंतव्य बनेगा। इसके लिए उसे भ्रष्टाचार से मुक्त होना पड़ेगा। निर्णय प्रक्रिया में तेजी लानी होगी। व्यापार सुगम माहौल बनाना होगा। विदेशी निवेश की प्रक्रिया को आसान बनाए जाने के बावजूद राज्य के स्तर पर इसमें देरी हो रही है। हर बार जब प्रोजेक्ट में विलंब होता है। उसमें बाधाएं डाली जाती हैं, तो उससे माहौल बिगड़ता है। नौकरियां जाती हैं। राजस्व का नुकसान होता है। भारत की छवि खराब होती है, जिससे भविष्य के निवेश पर असर पड़ता है।

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    सही नहीं सामाजिक कलह

    जेटली ने चेतावनी दी है कि जाति और धर्म के नाम पर किसी भी सामाजिक कलह से भावनाएं भड़क सकती हैं। इससे देश का विकास एजेंडा अपनी राह से भटक सकता है। उन्होंने पंजाब, कश्मीर, पूर्वोत्तर में उग्रवादी दौर के बावजूद भारत को हर तरह की सुरक्षा के लिहाज से स्वर्ग बताया।

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