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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 10, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

कैबिनेट के फैसले में एनबीएफसी के लिए उदार हुए एफडीआइ नियम

By Rajesh KumarEdited By:
Updated: Thu, 11 Aug 2016 09:35 AM (IST)

सरकार ने एफडीआई के नियमों को उदार बनाते हुए ऑटोमैटिक मंजूरी के दायर में आने वाली अन्य वित्तीय सेवाएं देनेवाली एनबीएफसी को शामिल कर लिया है।

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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। देश के गैर बैंकिंग वित्तीय क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआइ) का प्रवाह बढ़ाने को इस क्षेत्र का दायरा बढ़ा दिया है। सरकार ने एफडीआइ के नियमों को उदार बनाते हुए ऑटोमैटिक मंजूरी के दायरे में आने वाली अन्य वित्तीय सेवाएं देने वाली एनबीएफसी को भी शामिल कर लिया है। लेकिन इन कंपनियों में एफडीआइ की ऑटोमैटिक मंजूरी का नियम तभी लागू होगा जब वे कंपनियां किसी रिजर्व बैंक अथवा सेबी जैसे नियामकों के दायरे में शामिल हों।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई। मौजूदा नियमों में केवल 18 विशिष्ट प्रकार की सेवाएं देने वाली एनबीएफसी में ही एफडीआइ के लिए ऑटोमैटिक मंजूरी की अनुमति थी। बाकी अन्य वित्तीय सेवाओं की श्रेणी में आने वाली कंपनियों को एफडीआइ के लिए पहले मंजूरी लेनी होती थी। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 2016-17 के बजट में अन्य वित्तीय सेवाएं देने वाली गैर बैंकिंग कंपनियों के लिए भी एफडीआइ नियमों को उदार बनाने का ऐलान किया था।

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नवंबर 2015 के बाद एफडीआइ नियमों को सरल बनाने के क्रम में यह तीसरा बड़ा फैसला है। इसी साल जून में सरकार ने रक्षा और नागरिक उड्डयन समेत आठ क्षेत्रों के लिए एफडीआइ के नियमों को आसान बनाने का फैसला किया था। एफडीआइ नियमों को उदार बनाने की दिशा में सरकार ने न्यूनतम पूंजी की शर्तो को हटा लिया है क्योंकि अधिकांश नियामक इसके लिए खुद नियम तय कर चुके हैं।

सरकार के इस फैसले से न केवल देश में एफडीआइ का प्रवाह बढ़ेगा बल्कि इससे आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार भी बढ़ेगी। सरकार के बयान के मुताबिक इसका असर पूरे देश पर होगा और किसी राज्य या जिले तक सीमित नहीं रहेगा। वर्तमान में 18 प्रकार की वित्तीय सेवाएं देने वाली एनबीएफसी में सौ फीसद एफडीआइ ऑटोमैटिक मंजूरी के तहत आता है। इनमें मर्चेट बैंकिंग, अंडर राइटिंग, पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सेवाएं, वित्तीय सलाहकार सेवाएं और स्टॉक ब्रोकिंग आदि शामिल हैं।

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साल 2015-16 में देश में एफडीआइ के प्रवाह में 29 फीसद की वृद्धि हुई थी और 40 अरब डालर का एफडीआइ आया था। अक्टूबर 2014 से मई 2016 तक देश में आने वाले एफडीआइ में 46 फीसद की वृद्धि दर्ज की जा चुकी है।

एक अन्य फैसले में कैबिनेट ने भारतीय खाद्य निगम के 35000 कर्मचारियों के लिए न्यू पेंशन स्कीम और रिटायरमेंट के बाद मेडिकल सर्विस के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी। इस पर सालाना 134.4 करोड़ रुपये की लागत आएगी।