विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 08, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

रामकृपाल से नाराज लालू, कहा- रेस के बीच में नहीं बदलते घोड़ा

By Edited By:
Updated: Sat, 08 Mar 2014 01:44 PM (IST)

राष्ट्रीय जनता दल के नेता रामकृपाल यादव को लेकर चल रहे घटनाक्रम में एक नया मोड़ आ गया है। उम्मीदवारी के एलान के साथ राजद में हुए विद्रोह का केंद्र बन ग ...और पढ़ें

News Article Hero Image

पटना। राष्ट्रीय जनता दल के नेता रामकृपाल यादव को लेकर चल रहे घटनाक्रम में एक नया मोड़ आ गया है। उम्मीदवारी के एलान के साथ राजद में हुए विद्रोह का केंद्र बन गए रामकृपाल को मनाने लालू यादव की बेटी मीसा उनके दिल्ली आवास पर पहुंच गईं और उन्होंने सीधे कह दिया कि 'अगर चाचा जी (रामकृपाल यादव) मेरी पाटलिपुत्र से उम्मीदवारी पर नाराज हैं, तो मैं यह सीट छोडऩे को तैयार हूं।' रामकृपाल 'भतीजी' की बातों पर पिघल गए हैं। बोले-'मैंने अपनी भतीजी की बातें मान ली हैं। हां, लालू प्रसाद जी को इसका एलान करना होगा।' लेकिन लालू इसके लिए तैयार नहीं हैं। लालू के अनुसार मैंने जो निर्णय खुलेआम कर दिया है, उसमें कोई बदलाव नहीं होगा। पार्टी, भावना से नहीं चलती है। रामकृपाल को जो कहना है पार्टी फोरम पर कहें। रेस में छोड़ दिए गए घोड़े को बीच में नहीं बदला जाता है। पार्टी के संसदीय बोर्ड में सर्वसम्मति से मुझे उम्मीदवार तय करने के लिए अधिकृत किया था। बोर्ड में रामकृपाल भी थे। उनको पहले ही मुझसे अपने बारे में कहना चाहिए था। मैंने ठोक-बजाकर निर्णय किया है। यह कायम रहेगा। मेरी बेटी रामकृपाल से बात करने गई थी। मिले नहीं। बस मीडिया के माध्यम से बात हो रही है।

इससे पहले रामकृपाल को मनाने का गुरुवार को शुरू हुआ प्रयास शुक्रवार रात तक जारी रहा। इसमें राजद सुप्रीमो का परिवार जुटा रहा। रामकृपाल दिल्ली स्थित आवास पर पहुंचीं मीसा ने कहा-'मुझे मीडिया से जानकारी मिली है कि मेरे चाचा (रामकृपाल यादव), जो मेरे पिता तुल्य भी हैं, मेरी पाटलिपुत्र से उम्मीदवारी को लेकर खफा हैं। मैं यह सीट छोड़ दूंगी। मैं नहीं चाहती कि चाचा जी, जो अरसे से सामाजिक न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं, उससे भटक जाएं। मैं इसे मजबूत करना चाहती हूं।' मीसा की आवाज भर्रा गई थी। वह रामकृपाल से मिलने को पांच घंटे बैठी रहीं। बाद में फोन पर बात हुई।

आवाज तो रामकृपाल की भी भर्राई हुई थी। यह मजबूत चेहरा आज ऐसा लग रहा था मानों अब रो देगा। वे पूछे जाने पर यही बात दोहराते रहे-'मैं नाराज नहीं हूं। बहुत दुखी हूं। आहत हूं। अभी तक तो राजद में ही हूं। बड़ी तकलीफ हुई है। प्रदेश भर के हमारे कार्यकर्ता दुखी हैं। मुझे इसकी चिंता है। मेरे लिए चुनाव लडऩा बहुत मतलब नहीं रखता है। पार्टी ने मुझसे पांच-पांच चुनाव लड़वाए हैं। बहुत सम्मान व प्यार दिया है। मैं लालू जी के बारे में कुछ नहीं बोलूंगा। गलत बात है कि मेरी भाजपा व जदयू नेताओं से बात हुई है।'

लालू लगातार कह रहे थे-'रामकृपाल को कुछ लोग गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने कभी मुझसे लोकसभा चुनाव लडऩे की बात नहीं कही। मैंने तो उनको पूरी ताकत दी हुई है। वो भटककर अपना जीवन खराब नहीं करेंगे। उन्होंने राजद में विद्रोह की बात को नकारा। कहा-'यदि कोई व्यक्ति पार्टी छोड़कर जाना चाहता है तो वह उसको रोकेंगे नहीं। मैं किसी से बात नहीं करूंगा।' राबड़ी देवी का दावा रहा कि रामकृपाल कहीं नहीं जाएंगे। इस दौरान यह चर्चा भी फैली कि भाजपा व जदयू की तरफ से रामकृपाल पर डोरे डाले जा रहे हैं। भाजपा नेता गिरिराज सिंह ने कहा कि देश को रामकृपाल की जरूरत है। जदयू के कई नेताओं के भी बयान आए। देर रात सीन पूरी तरह बदला हुआ मगर साथ-साथ उलझा हुआ दिखा। रामकृपाल, शनिवार को दिल्ली से पटना आ रहे हैं। सबकी नजरें इसी बात पर टिकीं हैं कि अब क्या होता है?

पढ़ें: लालू से नाराज रामकृपाल ने छोड़ा राजद