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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 04, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    उत्तर कोरिया को लेकर भारत की है ये राय, जानते हैं आप

    By Kamal VermaEdited By:
    Updated: Tue, 14 Nov 2017 10:53 AM (IST)

    दक्षिण कोरिया में तैनात भारतीय राजदूत का कहना है कि उत्तर कोरिया के मुद्दे पर भारत अमेरिका के साथ है और कोरियाई प्रायद्वीप को परमाणु हथियार मुक्त बनान ...और पढ़ें

    उत्तर कोरिया को लेकर भारत की है ये राय, जानते हैं आप
    उत्तर कोरिया को लेकर भारत की है ये राय, जानते हैं आप

    नई दिल्‍ली (कमल कान्‍त वर्मा)। कोरियाई प्रायद्वीप को लेकर उपजे विवाद पर भारत ने अपना रुख स्‍पष्‍ट कर दिया है। भारत इस मुद्दे पर अमेरिका के साथ खड़ा है। वह भी अमेरिका की ही भांति इस क्षेत्र को परमाणु हथियार मुक्‍त क्षेत्र बनाए रखना चाहता है। इस बात का जिक्र खुद दक्षिण कोरिया में तैनात भारतीय राजदूत विक्रम दुरईस्‍वामी ने दैनिक जागरण को दिए एक इंटरव्‍यू में किया है। उन्‍होंने साफतौर पर इस बात को कहा कि भारत इस संबंध में अमेरिका के विचारों का समर्थन करता है। भारतीय राजदूत का कहना था कि भारत उत्तर कोरिया द्वारा किए गए मिसाइल और परमाणु परीक्षणों का विरोध करता है और परमाणु प्रसार के संबंध में पहले भी अपनी चिंता जाहिर कर चुका है।

    विक्रम ने इस साक्षात्‍कार में यह भी माना कि निजी तौर पर उन्‍हें उत्तर कोरिया से कोई डर नहीं लगता है, लेकिन जिस तरह से उसके तानाशाह किम जोंग उन की तरफ से लगातार मिसाइल परीक्षण और इसको लेकर बयानबाजी की जा रही है, वह चिंताजनक जरूर है। यह पूछे जाने पर कि क्‍या दक्षिण कोरिया में बसे भारतीयों को वहां पर किसी तरह की डर की अनुभूति होती है तो उनका जवाब था, नहीं। उन्‍होंने इस सवाल के जवाब में बताया कि दक्षिण कोरिया में करीब 11,500 भारतीय रहते हैं। लेकिन वह भी उनकी तरह सीधेतौर पर दक्षिण कोरिया से कोई खतरा महसूस नहीं करते हैं। लेकिन यदि स्थिति और खराब होती है तो चिंता होना स्‍वाभाविक है।

    भारतीय राजदूत का कहना  है कि इस क्षेत्र में उपजे विवाद के मद्देनजर अमेरिका इस बात का जिक्र पहले ही कर चुका है कि वह इस क्षेत्र में युद्ध नहीं चाहता है और इस विवाद को कूटनीतिक तरीके से सुलझाने का पक्षधर है। हालांकि यह समय ही बताएगा कि इसमें अमेरिका कितना सफल हो पाता है। गौरतलब है कि उत्तर कोरिया और अमेरिका के बीच उपजे तनाव के बीच विश्‍व के कुछ देशों ने युद्ध छिड़ने की आशंका जताई है। हालांकि इस बाबत सवाल पूछे जाने पर विक्रम ने कहा कि किसी देश का तानाशाह दूसरे देश के बारे में क्‍या विचार रखता है और क्‍या निर्णय लेता है इसको समझ पाना थोड़ा मुश्किल है। लेकिन इसके उलट एक बात बेहद स्‍पष्‍ट है कि इस क्षेत्र में तैनात किए गए हथियार और किम द्वारा विकसित किए गए हथियार कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। इसके अलावा उन्‍होंने इस बाबत उत्तर कोरिया के दूसरे देशों के संबंधों की तरफ भी इशारा किया है।

    भारतीय राजदूत ने यह भी कहा कि दक्षिण कोरिया की मीडिया उत्तर कोरिया की तरफ से होने वाली किसी भी तरह की हलचल पर पैनी निगाह रखे हुए है। इस विवाद को सुलझाने के बाबत पूछे गए एक सवाल के जवाब में उन्‍होंने माना कि इसमें रूस और चीन दोनों ही अहम भूमिका निभा सकते हैं। यह भूमिका इस क्षेत्र में स्थित किसी भी दूसरे देश से अधिक हो सकती है। साथ ही उन्‍होंने यह भी माना कि भारत के परिप्रेक्ष्‍य में इस विवाद के कोई मायने नहीं हैं, बावजूद इसके वह भी इस विवाद को सुलझाने में अन्‍य किसी भी देश की ही तरह इस क्षेत्र में शांति स्‍थापित करने में एक अहम भूमिका निभा सकता है। उनका यह भी कहना था कि दुनिया के सभी देशों की इस विवाद को सुलझाने में जवाबदेही होनी चाहिए।

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    यहां पर यह बात ध्‍यान में रखने वाली है कि अमेरिकी राष्‍ट्रपति फिलहाल एशियाई दौर पर हैं। ऐसे में उत्तर कोरिया को लेकर उनकी नीतियों पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में भारतीय राजदूत विक्रम दुरईस्‍वामी का कहना था कि उनकी नीतियां अमे‍रिका को ध्‍यान में रखकर बनाई गई हैं। लिहाजा इस पर कोई टिप्‍पणी करना सही नहीं होगा।

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