यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 05, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
कांग्रेस से गठबंधन में भारी पड़े लालू
बिहार में राजनीतिक गठबंधन की बिसात पर आखिर लालू के मोहरों को जीत मिली। लंबी जद्दोजहद के बाद बुधवार को कांग्रेस-राजद-राकांपा के गठबंधन पर मुहर लग गई। आ ...और पढ़ें

पटना [जागरण ब्यूरो]। बिहार में राजनीतिक गठबंधन की बिसात पर आखिर लालू के मोहरों को जीत मिली। लंबी जद्दोजहद के बाद बुधवार को कांग्रेस-राजद-राकांपा के गठबंधन पर मुहर लग गई। आगामी आम चुनाव में बिहार की 40 लोकसभा सीटों पर राजद 27, कांग्रेस 12 व राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी एक सीट पर अपने उम्मीदवार उतारेगी। राजद ने कांग्रेस की जिद को पूरी करने से इन्कार करते हुए उसे वही सीटें दी, जो पहले से तय थी। हालांकि लालू को एक कदम पीछे हटते हुए मुजफ्फरपुर की सीट कांग्रेस के लिए छोड़नी पड़ी।
बुधवार को बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के सरकारी आवास पर समझौते की घोषणा हुई। इसमें राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अशोक चौधरी व एनसीपी के मीडिया प्रभारी अनल कुमार झा मौजूद थे। नेताओं ने सामूहिक बयान में कहा कि धर्मनिरपेक्ष ताकतों को रोकने के लिए यह गठबंधन हुआ है। कांग्रेस को मिली 12 सीटों में सासाराम व किशनगंज में उसके ही सांसद हैं। इसके अलावा औरंगाबाद, सुपौल, हाजीपुर, पूर्णिया, पटना साहिब, नालंदा, समस्तीपुर, वाल्मीकिनगर, मुजफ्फरपुर और गोपालगंज की सीटें कांग्रेस को दी गई, जबकि एनसीपी को कटिहार की सीट दी गई है।
जहां से पार्टी के नेता और केंद्रीय मंत्री तारिक अनवर चुनाव लड़ेंगे। गठबंधन में राजद की जीत इस बात से भी देखी जाती है कि उसने कांग्रेस के बड़े कहे जाने वाले नेताओं के दावे की सीटों को भी नहीं छोड़ा। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डॉ. शकील अहमद मधुबनी से, प्रदेश अध्यक्ष अशोक चौधरी जमुई से, कांग्रेस विधायक दल के नेता सदानंद सिंह भागलपुर से और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. अखिलेश प्रसाद सिंह पश्चिमी चंपारण से चुनाव लड़ना चाहते थे।
