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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 27, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

हार के बाद बड़ा फेरबदल हो सकता है महाराष्ट्र कांग्रेस में

By Sachin BajpaiEdited By:
Published: Mon, 27 Feb 2017 09:17 PM (GMT+05:30)Updated: Mon, 27 Feb 2017 09:25 PM (GMT+05:30)

मुंबई महानगरपालिका में तो कांग्रेस पिछली बार की 52 सीटों से खिसककर 31 पर आ गई है।

हार के बाद बड़ा फेरबदल हो सकता है महाराष्ट्र कांग्रेस में
हार के बाद बड़ा फेरबदल हो सकता है महाराष्ट्र कांग्रेस में

राज्य ब्यूरो, मुंबई । महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनावों में करारी हार के बाद कांग्रेस आलाकमान न सिर्फ मुंबई क्षेत्रीय कांग्रेस समिति, बल्कि प्रदेश इकाई में भी बड़े फेरबदल का विचार कर रहा है। माना जा रहा है कि इस संबंध में कोई निर्णय पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद ही लिया जाएगा।

पिछले गुरुवार को आए स्थानीय निकाय चुनाव के फैसलों ने कांग्रेस की चूलें हिला दी हैं। मुंबई सहित राज्य की दस बड़ी महानगरपालिकाओं (मनपा) और 25 जिला परिषदों के चुनाव में कांग्रेस को मुंह की खानी पड़ी है। मुंबई महानगरपालिका में तो कांग्रेस पिछली बार की 52 सीटों से खिसककर 31 पर आ गई है। कभी रजनी पटेल और मुरली देवड़ा जैसे नेताओं के नेतृत्व में मुंबई मनपा में कांग्रेस की तूती बोलती थी। इस कांग्रेस का स्कोर अब तक का न्यूनतम रहा है। शेष महाराष्ट्र में भी हाल बुरा है। विलासराव देशमुख और शिवाजी पाटिल जैसे नेताओं के जिले लातूर में कांग्रेस जिला परिषद हार गई है। सुशील कुमार शिंदे के जिले सोलापुर में महानगरपालिका गंवानी पड़ी है। पश्चिम महाराष्ट्र सहकारी चीनी मिलों के कारण कभी कांग्रेस का गढ़ माना जाता था। स्थानीय निकाय चुनावों में कांग्रेस यहां हमेशा विजयी रहती आई है। इस बार पश्चिम महाराष्ट्र ने भी कांग्रेस का साथ छोड़ दिया।

इस करारी हार के बाद मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष संजय निरूपम ने तो परिणाम आते ही अपना त्यागपत्र कांग्रेस आलाकमान को भेज दिया था। लेकिन, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अशोक चव्हाण की तरफ से ऐसा कोई संकेत नहीं दिया गया है। आदर्श घोटाले में लगे गंभीर आरोपों के बाद चव्हाण को मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़नी पड़ी थी। 2014 के लोकसभा चुनाव में प्रबल मोदी लहर के बावजूद वह अपने जिले नांदेड़ की लोकसभा सीट बचाने में कामयाब रहे थे। संभवत: इसीलिए उन्हें दागी होने के बावजूद प्रदेश कांग्रेस की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। लेकिन, अब निकाय चुनावों में हार के बाद आलाकमान ने पुनर्विचार शुरू कर दिया है। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, गाज तो महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रभारी मोहन प्रकाश पर भी गिर सकती है।

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