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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 21, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    नोटबंदी के बाद अब तक 60 नियमों की घोषणा, RBI की साख पर सवाल

    By Lalit RaiEdited By:
    Updated: Thu, 22 Dec 2016 05:55 AM (IST)

    नोटबंदी के फैसले के बाद आरबीआई ने अब तक करीब 60 नियम को अमल में लाने की घोषणा की। लेकिन आधा दर्जन नियम ही मुश्किल से लागू हो सके। ...और पढ़ें

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    जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली । नोटबंदी लागू होने के बाद जिस तरह से आरबीआइ एक के बाद एक नये नियम लागू कर रहा है और जिस तरह से दबाव में उसे इन नियमों को वापस लेना पड़ रहा है उसने देश के केंद्रीय बैंक की साख को लेकर कई परेशान करने वाले सवाल उठा दिये हैं। आरबीआइ ने अगर कुछ नियमों को वापस लिया है तो उसके तकरीबन आधा दर्जन ऐसे नियम हैं जिन्हें लागू ही नहीं किया जा सका। इसमें कुछ नियम तो ऐसे हैं जिसे वित्त मंत्रालय के साथ शीर्षस्तरीय बैठक में लिया गया।

    सिर्फ एक दिन लगी स्याही

    8 नवंबर, 2016 को नोटबंदी लागू होने के बाद जब बैंकों के सामने लोगों की हुजूम उमड़ पड़ी तो वित्त मंत्रालय व आरबीआइ के बीच उच्चस्तरीय बैठक में फैसला किया गया पुराने के बदले नए नोट लेने वालों के ग्राहकों के हाथों में स्याही लगाई जाएगी ताकि वे एक हफ्ते तक फिर बैंक नहीं आये। लेकिन आरबीआइ के निर्देश के बावजूद स्याही हर बैंक तक नहीं पहुंच सकी। इस बीच चुनाव आयोग ने भी इस फैसले पर ऐतराज जताया कि मतदान में इस्तेमाल होने वाली इस स्याही का बाद में दुरुपयोग हो सकता है। बहरहाल, दो दिनों बाद किसी भी बैंक ने स्याही का इस्तेमाल नहीं किया।

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    अलग पंक्ति का इंतजार ही करते रहे गये बुजुर्ग

    ग्राहकों की भीड़ को देखते हुए यह भी फैसला किया गया कि बुजुर्गो के लिए बैंक अलग पंक्ति लगाएंगे। यह नियम भी दो दिनों से ज्यादा लागू नहीं हो पाये। कुछ जगहों पर बुजुर्गो को तरजीह जरुरत दी गई लेकिन अधिकांश जगहों पर बैंक उनके लिए अलग पंक्ति की व्यवस्था नहीं कर सके।

    शादी के लिए मिलेंगे ढाई लाख

    सरकार के सुझाव पर रिजर्व बैंक ने शादी ब्याह वाले परिवार को ढाई लाख रुपये देने की व्यवस्था की। लेकिन इसके लिए ऐसे नियम बनाये गये जिसे लागू करना बैंकों के वश की बात नहीं थी। मसलन, शादी में मिठाई बनाने वालों और टेंट वगैरह लगाने वालों से पूछताछ कर यह सत्यापन करना कि उनके बैंक खाते नहीं है। कुछ ही मामलों में ये नियम भी लागू हुए। अधिकांश लोगों को शादी के कार्ड ले कर खाली हाथ ही बैंक ब्रांच से वापस लौटना पड़ा।

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    किसान करते रहे कर्ज का इंतजार

    नोटबंदी उस समय लागू हुई थी जब देश में बुवाई का काम चरम पर था। किसानों की दिक्कतों को खत्म करने के लिए बैंकों को निर्देश दिया गया कि ग्रामीण क्षेत्रों में पर्याप्त कर्ज उपलब्ध कराने की व्यवस्था हो। लेकिन इस पर अमल करने में बैंक बुरी तरह से असफल रहे। नोटों की समस्या की वजह से किसानों को समय पर कर्ज नहीं मिल सकी।

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    पेट्रोल पंप पर मिलेगी नकदी

    जनता की परेशानी को देख सरकार व आरबीआइ ने पेट्रोल पंपों व सरकारी भवनों में बैंक मित्रों (बैंकिंग कारेसपोंडेंट) के जरिए नकदी वितरित करने की योजना शुरु की। लेकिन सिर्फ गिने चुने पेट्रोल पंपों पर यह योजना अभी तक लागू हुई। पेट्रोल पंपों पर भीड़ बढ़ी तो पेट्रोल पंपों ने ही इससे हाथ खींच लिया। जब सरकार को यह सूचना मिली की इसकी आड़ में पेट्रोल पंपों पर दूसरी तरह का खेल शुरु हो गया है तो उसने भी बढ़ावा देना बंद कर दिया।

    कभी नहीं मिली पूरी राशि

    सरकार ने नियम बनाये कि हर बैंक ग्राहक सप्ताह में 24 हजार रुपये की राशि और वह भी एक बार में निकाल सकती है। लेकिन यह एक ऐसा नियम है संभवत: एक फीसद बैंकों में भी पालन नहीं किया गया। आज की तारीख में भी बैंक नकदी देने में राशनिंग कर रहे हैं।

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