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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 01, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

जाट आंदोलन: प्रकाश सिंह कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक, जानें-10 मुख्य बातें

By Manish NegiEdited By:
Published: Wed, 01 Jun 2016 11:23 AM (IST)Updated: Wed, 01 Jun 2016 12:26 PM (IST)

हरियाणा में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान भड़की हिंसा पर बनी प्रकाश सिंह समिति को सार्वजनिक कर दिया गया है। ...और पढ़ें

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नई दिल्ली, (जेएनएन)। जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान भड़की हिंसा पर बनी प्रकाश सिंह कमेटी की रिपोर्ट को हरियाणा सरकार ने सार्वजनिक कर दिया है। इसे मुख्य सचिव की बेवसाइट पर अपलोड किया गया है। इस रिपोर्ट में कई मुख्य बातें सामने आई है। कमेटी की रिपोर्ट को दो हिस्सों में बनाया गया है। इस रिपोर्ट का पहला हिस्सा सार्वजनिक किया गया है, जबकि रिपोर्ट का दूसरा भाग खुफिया विभाग के लिए है।

जाट आंदोलन के दौरान हरियाणा पुलिस ने सेना को किया था गुमराह ?

कमेटी की रिपोर्ट में खास दस बातें

1. रिटायर्ड आईपीएस अफसर प्रकाश सिंह ने 71 दिन की जांच के बाद 13 मई को मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को रिपोर्ट सौंपी थी।

2. कमेटी ने जांच के दौरान 2217 लोगों से बातचीत की और 387 हलफ़नामे का ज़िक्र करते हुए पुलिस की कार्यप्रणाली में सुधार की बात कही।

3. प्रकाश सिंह ने बताया कि इस रिपोर्ट में 90 अधिकारियों ने लापरवाही बरती, जिसमें आईएएस, आईपीएस और ड्यूटी मजिस्ट्रेट भी शामिल हैं।

4. रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि तत्कालीन डीजीपी यशपाल सिंघल को पूरे मामले की जानकारी थी, लेकिन उन्होंने बीमार होने की बात कह कर अपने ज़िम्मेदारी नहीं निभाई। अगर सिंघल चाहते तो हेलीकॉप्टर से हिंसा प्रभावित इलाकों का दौरा कर सकते थे।

5. इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सांसद राजकुमार सैनी के आरक्षण पर दिए बयानों ने जाट समुदाय को भड़काया। इसी तरह जाट समुदाय के मनोज दूहन और सुदीप कलकल समेत अन्य नेताओं ने गैर जाट समुदाय के खिलाफ आग भड़काई।

6. रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि हिंसक आंदोलन के वक्त लोगों की मदद के लिए एक कंट्रोल रुम तक नहीं बनवाया गया, जोकि बड़ी चूक रही।

7. हरियाणा में जातीय हिंसा के दौरान पुलिस के साथ-साथ आम लोगों के लाइसेंसी हथियारों की जमकर लूटपाट हुई। इन लूटे हुए हथियारों का दंगों में इस्तेमाल हुआ और एक दूसरे की जान ली गई।

8. राज्य में पंचायत चुनाव की वजह से लोगों के लाइसेंसी हथियार थानों में जमा थे, जिन्हें दंगाइयों ने लूट लिया। थानों से 100 गन, 39 रिवाल्वर, 2015 कारतूस लूटे गए। अकेले रोहतक में 94 लाइसेंसी हथियार लूटे गए।

9. कमेटी ने सवाल उठाए हैं कि सेना की शक्ति का इस्तेमाल भीड़ को संभालने के लिए किया गया, जबकि राज्य की ओर से हिंसा को रोकने के लिए सेना के 12 बटालियन की मांग की गई थी।

10. पैनल ने कहा कि यह साफ जाहिर होता है कि 4050 उत्पातियों के एक छोटे से दल जिसे सेना आसानी से तितर-बितर कर सकती थी। इन्हें बचाने के लिए सेना को दूर रखा गया। इस काम के लिए एसडीएम और डीएसपी को जिम्मेदार ठहराया गया है और आंशिक रूप से इसेे कायरतापूर्ण हरकत माना गया है।

रिपोर्ट में खुलासा, पुलिस की पिटाई ने भड़कायी हरियाणा में जाट हिंसा

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