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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 28, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

संघ ने किया तीखा पलटवार, कहा- उमर की जागीर नहीं कश्मीर

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Updated: Thu, 29 May 2014 10:37 AM (IST)

अनु'छेद-370 पर आरएसएस ने जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पर करारा पलटवार किया है। इस अनु'छेद को हटाने की स्थिति में राज्य के भारत का हिस्सा ...और पढ़ें

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नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। अनुच्छेद-370 पर आरएसएस ने जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पर करारा पलटवार किया है। इस अनुच्छेद को हटाने की स्थिति में राज्य के भारत का हिस्सा नहीं रहने के उमर के बयान पर तीखा हमला करते हुए संघ प्रवक्ता राम माधव ने साफ कर दिया कि अनुच्छेद-370 के रहने या न रहने से कोई फर्क नहीं पड़ता है। जम्मू-कश्मीर हमेशा से भारत का अभिन्न अंग रहा है और आगे भी रहेगा। इस अनुच्छेद को हटाने में खड़ी होने वाली कानूनी उलझनों को देखते हुए संघ ने केंद्र सरकार को राजग के सहयोगी दलों के बीच एकराय बनाने का सुझाव दिया है। गृह मंत्री राजनाथ सिंह और संघ नेता सुरेश सोनी की मुलाकात को भी इसी नजरिए से देखा जा रहा है। केंद्रीय परिवहन व जहाजरानी मंत्री नितिन गडकरी ने भी अनुच्छेद को हटाने की वकालत की है। बुधवार को जम्मू-कश्मीर के सीएम उमर अब्दुल्ला ने अपने बयान पर कायम रहते हुए संघ को काफी खरी-खरी सुनाई।

प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह के बयान पर असमय उपजे विवाद से यूं तो मोदी सरकार ने खुद को अलग कर लिया है। जितेंद्र सिंह ने भी सफाई देकर अपनी ओर से विवाद खत्म कर दिया है, लेकिन इस पर उमर अब्दुल्ला की प्रतिक्रिया आरएसएस को नागवार गुजरी। उमर के ट्वीट का जवाब ट्वीट से देते हुए राम माधव ने कहा कि जम्मू-कश्मीर उमर की जागीर नहीं है। यह राज्य हमेशा भारत का ही अंग रहेगा। जितेंद्र सिंह के बयान पर उमर अब्दुल्ला ने चेतावनी देते हुए कहा था कि या तो अनुच्छेद-370 मौजूद रहेगा या जम्मू-कश्मीर भारत का हिस्सा नहीं रहेगा। उमर के इस बयान को कुछ महीने में जम्मू-कश्मीर में होने वाले विधानसभा चुनावों से जोड़कर देखा जा रहा है। इसे चुनावी मुद्दा बनाकर उमर सत्ता विरोधी माहौल के असर को कम करने की कोशिश कर रहे हैं। यही कारण है कि उमर की सहयोगी पार्टी कांग्रेस ने इस मुद्दे पर मोदी सरकार को आड़े हाथ लिया है।

कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी के अनुसार, मोदी सरकार इस अनुच्छेद को नहीं हटा सकती। उन्होंने आरोप लगाया है कि एक रणनीति के तहत भाजपा ने जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव के दौरान मतों के धुव्रीकरण के लिए जानबूझकर यह विवाद खड़ा किया है। बुधवार को उमर ने पूछा कि केंद्र सरकार अनुच्छेद को हटाने के लिए जम्मू-कश्मीर के किन लोगों से बात कर रही है। राज्य के लोगों को इस बारे में जानकारी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हम अनुच्छेद-370 को भंग करने की किसी भी साजिश को नाकाम बनाएंगे। इस मामले को उछालने का मतलब है, जम्मू-कश्मीर के भारत में विलय पर विवाद खड़ा करना। गडकरी ने कहा कि अनुच्छेद-370 के कारण जम्मू-कश्मीर को मिले विशेष दर्जे के कारण राज्य के विकास की रफ्तार अवरुद्ध हो गई है, जबकि राज्य में विकास की अपार संभावनाएं मौजूद हैं।

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'जम्मू-कश्मीर भारत का हिस्सा नहीं रहेगा? क्या उमर इसे अपनी पैतृक संपत्ति समझते हैं? अनुच्छेद-370 रहे न रहे, जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग था और हमेशा रहेगा।' -राम माधव, प्रवक्ता, आरएसएस

'मेरी माई-बाप जम्मू-कश्मीर की अवाम है, संघ परिवार नहीं। मैं अपने राज्य के हक के लिए हर बात करने का हकदार हूं। केंद्र बताए कि राज्य के किन लोगों से अनुच्छेद हटाने पर बात हो रही है।' -उमर अब्दुल्ला, सीएम, जम्मू-कश्मीर

'जितेंद्र सिंह का बयान सांप्रदायिक आधार पर जम्मू-कश्मीर को बांटने की क्षमता रखता है। इससे देश के एक और बंटवारे को बल मिल रहा है।' -महबूबा मुफ्ती, पीडीपी अध्यक्ष

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