यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 13, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
यूपीए सरकार में भी थे नाइक के पैरोकार, मंत्री ने लिखा था नाइक के लिए पत्र
अपने विवादास्पद भाषणों से सुर्खियों में आए इस्लामिक उपदेशक जाकिर नाइक के खिलाफ यूपीए सरकार के दौरान मोर्चा खोलने वाले मीडिया का मुंह बंद कर दिया गया था।

नीलू रंजन, नई दिल्ली। ढाका हमले के बाद भले ही सरकार ने जाकिर नाइक के भाषणों की पड़ताल शुरू की हो, लेकिन चार साल पहले उसके खिलाफ मोर्चा खोलने वाले मीडिया का मुंह बंद कर दिया गया था। साढे़ तीन साल पहले उस समय के अल्पसंख्यक कार्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के रहमान खान ने तत्कालीन सूचना और प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी से इन मीडिया संस्थानों पर लगाम लगाने की मांग की थी। इस संबंध में पूछे जाने पर मनीष तिवारी ने कहा कि ऐसे किसी खत के बारे में उन्हें कुछ याद नहीं है।
10 फरवरी 2013 को अल्पसंख्यक कार्यमंत्री के लेटरहेड पर लिखे गए पत्र में के रहमान खान ने जाकिर नाइक को आतंकवाद का समर्थक बताने की खबरों को निहित स्वार्थ से प्रेरित बताया था। उन्होंने जाकिर नाइक को प्रख्यात भारतीय इस्लामिक विद्वान बताते हुए लिखा था कि कुछ मीडिया संस्थान उन्हें बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं और इससे नाइक और उनकी संस्था इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन को बचाया जाना चाहिए।
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के. रहमान खान के पत्र के अनुसार दिसंबर 2012 में इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन ने अपने और अपने अध्यक्ष के खिलाफ मीडिया में दिखाई जा रही खबरों की शिकायत की थी। इसी शिकायत के आधार पर उन्होंने अपने मंत्रिमंडलीय सहयोगी मनीष तिवारी से कार्रवाई करने का अनुरोध किया था। रहमान खान ने अपने पत्र के साथ-साथ मीडिया में दिखाई जा रही खबरों की सीडी भी सूचना व प्रसारण मंत्री को भेजी थी।
के रहमान खान का कहना था कि जाकिर नाइक के खिलाफ इस तरह की खबरें दिखाने से दो समुदायों में तनाव बढ़ सकता है और सांप्रदायिक भावनाएं भड़क सकती हैं। वैसे खत पर क्या कार्रवाई हुई यह स्पष्ट नहीं है। मनीष तिवारी ने कहा कि मंत्रालय में सैंकड़ों पत्र रोज आते हैं और रुटीन में उन्हें संबंधित अधिकारी के पास भेज दिया जाता है।
गौरतलब है कि ढाका में आतंकी हमला करने वाले के जाकिर नाइक से प्रभावित होने के बाद भारत सरकार सक्रिय हो गई है। केंद्र सरकार ने जाकिर नाइक के खिलाफ आरोपों की पड़ताल के लिए नौ टीमों का गठन कर दिया है। इसके साथ ही सबूतों के साथ जाकिर नाइक के खिलाफ एक आनलाइन याचिका भी तैयार की गई है, जिसपर आठ लाख से अधिक लोग हस्ताक्षर कर चुके हैं। यह ज्ञापन गृहमंत्री राजनाथ सिंह को सौंपी गई है। इसके साथ ही सरकार ने जाकिर नाइक के पीस टीवी के भारत में पूरी तरह प्रतिबंधित करने के लिए कई कदम उठाए हैं।

