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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 05, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

तीन तलाक मामलेे में चार हफ्ते के भीतर जवाब दे केंद्र: सुप्रीम कोर्ट

By Monika minalEdited By:
Updated: Mon, 05 Sep 2016 02:01 PM (IST)

तीन तलाक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को प्रतिक्रिया देने के लिए चार हफ्ते का समय दिया है।

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नई दिल्ली (एएनआई)। मुस्लिम महिला अधिकारों से संबंधित विभिन्न याचिकाओं मामले पर प्रतिक्रिया देने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को चार हफ्ते का समय दिया है।

उल्लेखनीय है कि तीन तलाक के मामले में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है। हलफनामे में बोर्ड ने कहा कि सामाजिक सुधार के नाम पर पर्सनल लॉ को दोबारा नहीं लिखा जा सकता और तलाक की वैधता सुप्रीम कोर्ट के अधिकार में नहीं है। मुस्लिम पर्सनल लॉ कोई कानून नहीं है जिसे चुनौती दी जा सके, बल्कि ये कुरान से लिया गया है। ये इस्लाम धर्म से संबंधित सांस्कृतिक मुद्दा है।

बोर्ड ने हलफनामे में कहा, तलाक, शादी और देखरेख अलग-अलग धर्म में अलग-अलग हैं। एक धर्म के अधिकार को लेकर कोर्ट फैसला नहीं दे सकता। कुरान के मुताबिक तलाक अवांछनीय है लेकिन जरूरत पड़ने पर दिया जा सकता है। इस्लाम में ये पॉलिसी है कि अगर दंपति के बीच नहीं बन रही है तो संबंध को खत्म कर दिया जाए। तीन तलाक को इजाजत है क्योंकि पति सही निर्णय ले सकता है, वो जल्दबाजी में फैसला नहीं लेते। वैध कारणों की स्थिति में तीन तलाक इस्तेमाल किया जाता है।

हालांकि पहले कई मामलों में सुप्रीम कोर्ट ये मामला तय कर चुका है।

तीन तलाक पर कानून वैधता से पहले बहस चाहता है सुप्रीम कोर्ट