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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 26, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

जनरल कमर जावेद बाजवा होंगे पाकिस्‍तान सेना के नए चीफ

By Sachin BajpaiEdited By:
Updated: Sat, 26 Nov 2016 08:36 PM (IST)

जीएचक्‍यू में पदस्‍थ लेफ्टिनेंट जनरल कमर जावेद बाजवा को अगला सेनाध्‍यक्ष नियुक्त किया गया है।

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इस्लामाबाद, रायटर। लेफ्टिनेंट जनरल कमर जावेद बाजवा पाकिस्तान के अगले सेना प्रमुख होंगे। उनके नाम को शनिवार को प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने स्वीकृति दी। वह 29 नवंबर को अवकाश ग्रहण कर रहे जनरल राहील शरीफ का स्थान लेंगे। उन्हें कश्मीर मामले का अच्छा जानकार माना जाता है। पाकिस्तानी सूत्र बताते हैं कि वह जेहादी ताकतों को पाकिस्तान के लिए बड़ा खतरा भी मानते हैं।

आने वाला समय बताएगा कि कश्मीर में सक्रिय आतंकी संगठनों को पाकिस्तानी सेना की मदद में इजाफा होगा या कमी आएगी। बाजवा संख्या के लिहाज से दुनिया की छठवीं सबसे बड़ी सेना के प्रमुख होंगे, जो इस समय नियंत्रण रेखा पर भारतीय सेना के साथ वार-प्रतिवार कर रही है। बाजवा कोंगो में संयुक्त राष्ट्र की शांति सेना में भी काम कर चुके हैं, जहां पर वह भारत में सेना प्रमुख रह चुके जनरल बिक्रम सिंह के मातहत थे। लेफ्टिनेंट जनरल जुबैर हयात को ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी का चेयरमैन नियुक्त किया गया है।

प्रधानमंत्री की सिफारिश पर राष्ट्रपति मामनून हुसैन ने दोनों अधिकारियों को प्रोन्नत कर दिया है। पाकिस्तान में सेना का वहां की राजसत्ता में प्रभावशाली दखल है। सेना के प्रभाव से ही वहां की विदेश नीति तय होती है और जनता द्वारा चुनी हुई सरकार काम करती है। उल्लेखनीय है कि जनरल शरीफ पिछले 20 साल में पहले ऐसे सेना प्रमुख हैं, जो निर्धारित सेवाकाल के बाद अवकाश ग्रहण कर रहे हैं। उन्हें कोई सेवा विस्तार नहीं मिला है।

कौन था रेस में

सेनाध्यक्ष पद के लिए मुख्य रूप से चार दावेदार मैदान में थे। अन्य दावेदारों में जनरल स्टाफ के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल जुबैर हयात और मुल्तान में कमांडिंग ऑफिसर लेफ्टिनेंट जनरल इश्फाक नदीम अहमद शामिल थे।

वरिष्ठता के मुताबिक पहला नाम लेफ्टिनेंट जनरल ज़ुबैर महमूद हयात का था जो फिलहाल सैन्य मुख्यालय में चीफ ऑफ जनरल स्टाफ पद पर हैं। इसके बाद दूसरा नाम लेफ्टिनेंट जनरल अशफाक नदीम अहमद का था जो मुल्तान के कोर कमांडर हैं और इससे पहले चीफ ऑफ जनरल स्टाफ रह चुके हैं। उन्होंने स्वात और उत्तरी वज़ीरिस्तान में चरमपंथियों के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई की है।

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