विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 22, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

ईरान भी बनना चाहता है चीन-पाकिस्तान इकॉनोमिक कॉरिडोर का हिस्सा

By Rajesh KumarEdited By:
Updated: Thu, 22 Sep 2016 08:24 PM (IST)

पाकिस्तान के पीएम नवाज शरीफ से मुलाकात में ईरान के राष्ट्रपति रूहानी ने सीपीईसी का हिस्सा बनने की इच्छा जाहिर की है।

News Article Hero Image

न्यूयॉर्क, प्रेट्र। अरबों डॉलर की लागत से बननेवाले चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) का हिस्सा बनने को लेकर ईरान ने गुरूवार को अपनी इच्छा जाहिर की। यह आर्थिक गलियारा पश्चिमी चीन को ब्लूचिस्तान के समुद्री बंदरगाह से होते हुए पाकिस्तान के नियंत्रण वाले कश्मीर को जोड़ता है।

71वें संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र से इतर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के साथ बैठक के दौरान ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने यह बात कही।

प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के कार्यालय से जारी एक बयान में कहा गया, "राष्ट्रपति रूहानी सीपीईसी को हकीकत में बदलने की पीएम शरीफ की दूरदर्शिता की तारीफ करते हुए इसका हिस्सा बनने की अपनी इच्छा उन्होंने जाहिर की है।" बयान में आगे कहा गया कि कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट को पाकिस्तान और ईरान दोनों ही देशों ने क्षेत्र के विकास के लिए बेहद जरूरी माना है।

पढ़ें- CPEC को लेकर अपने ही घर में घिरा चीन, सरकारी अखबार ने चेताया

प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के कार्यालय से जारी बयान में आगे कहा गया है, “विशेषतौर पर दोनों नेताओं ने ग्वादर और चाबहार समुद्री बंदरगाहों को तारीफ करते हुए कहा कि इससे अगले दशकों में क्षेत्रीय व्यापार को काफी बढ़ावा मिलेगा।” गौरतलब है कि भारत ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से गुजरनेवाले इस चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे को लेकर अपनी चिंता जताई थी।

पढ़ें- अपने ही जाल में फंसा पाक, सिंध से लेकर लंदन तक उठी आजादी की मांग