विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 04, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

जूलियन असांजे पुलिस के समक्ष समर्पण को तैयार

By Gunateet OjhaEdited By:
Updated: Thu, 04 Feb 2016 05:16 PM (IST)

विकिलीक्स के संस्थापक जूलियन असांजे लंदन स्थित इक्वेडोर के दूतावास को छोड़कर पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण को तैयार हैं। लेकिन उनकी शर्त संयुक्त राष्ट्र के पैनल से उनके मामलों की जांच कराने की है।

News Article Hero Image

सिडनी। विकिलीक्स के संस्थापक जूलियन असांजे लंदन स्थित इक्वेडोर के दूतावास को छोड़कर पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण को तैयार हैं। लेकिन उनकी शर्त संयुक्त राष्ट्र के पैनल से उनके मामलों की जांच कराने की है। अपने ऊपर दर्ज मुकदमों के सिलसिले में गिरफ्तारी और स्वीडन को प्रत्यर्पित किए जाने से से बचने के लिए असांजे जून 2012 से इक्वेडोर दूतावास में शरण लिए हुए हैं। स्वीडन सरकार को दुष्कर्म के एक मामले में असांजे की तलाश है।

अमेरिका की खुफिया कार्रवाइयों पर किए रहस्योद्घाटनों से चर्चा में आए असांजे ने विकिलीक्स के ट्विटर पर पोस्ट किए बयान में कहा है कि वह शुक्रवार को दोपहर में दूतावास छोड़कर ब्रिटिश पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर सकते हैं। असांजे ने यह भी उम्मीद जतायी है कि उनके साथ कोई गैरकानूनी कार्रवाई नहीं होगी।

उम्मीद की है कि उनका पासपोर्ट वापस कर दिया जाएगा और गिरफ्तारी को बरकरार रखने के लिए कोई नया मुकदमा कायम नहीं किया जाएगा। असांजे को डर है कि स्वीडन उन्हें अमेरिका को प्रत्यर्पित कर सकता है। जहां उन पर गोपनीय सैन्य और कूटनीतिक दस्तावेज सार्वजनिक करने के आरोप में मुकदमा चलाया जा सकता है।

इतिहास में यह अमेरिका के गोपनीय दस्तावेजों को सार्वजनिक करने का सबसे बड़ा मामला है। असांजे ने विकिलीक्स के जरिये सन 2010 में अफगानिस्तान में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई से संबंधित 90 हजार गोपनीय दस्तावेज तथा इराक में कार्रवाई से संबंधित चार लाख दस्तावेज सार्वजनिक किए थे।

संयुक्त राष्ट्र के अवैध हिरासत से जुड़े एक कार्य समूह ने हाल ही में असांजे की प्रार्थना पर उनके मामले की सुनवाई की। असांजे ने कहा था कि दूतावास में उसकी रिहायश एक तरह की अवैध हिरासत है जिसे वह करीब तीन साल से झेल रहे हैं। गलत मुकदमों में फंसाए जाने के डर से वह दूतावास से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं और वहां बंदी जैसा जीवन जी रहे हैं।