यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 17, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
पाक सेना प्रमुख जनरल राहिल शरीफ को फील्ड मार्शल बनाने की उठी मांंग
पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल राहिल शरीफ को उनके उत्कृष्ठ काम और देश सेवा के लिए फील्ड मार्शन बनाने की मांग की गई है। यदि ऐसा होता है तो वह देश के दूसरे फील्ड मार्शल होंगे।

इस्लामाबाद (जेएनएन)। पाकिस्तान सेना के प्रमुख जनरल राहिल शरीफ को फील्ड मार्शल के पद पर नियुक्त करने की मांग को लेकर इस्लामाबाद हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। इसमें कहा गया है कि राहिल के बेहतर काम और देश सेवा को देखते है उन्हें फील्ड मार्शल बनाया जाना चाहिए। यह याचिका दो वकील राजा समयउल हक और सरदार सलीम ने दायर की है। इसमें उन्होंने सरकार समेत रक्षा सचिव को भी एक पक्ष बनाया है।
राहिल की देशभक्ति का जिक्र
पाकिस्तान के अखबार द डॉन के मुताबिक इस याचिका में उन्होंने राहिल शरीफ के परिवार की भी देशभक्ति का जिक्र किया है। इसमें कहा गया है कि उनके भाई मेजर शब्बीर शाह ने भारत के साथ 1971 में हुए युद्ध में और उनके चाचा ने 1965 की जंग में भारत से युद्ध करते हुए अपनी जान गंवाई थी। इसमें उनके द्वारा आतंकियों के खिलाफ चलाए गए जर्ब ए अजब ऑपरेशन के लिए भी उनकी तारीफ की गई है। इसके अलावा इसमें कहा गया है कि चीन और पाकिस्तान के बीच बनने वाले बिजनेस कॉरिडोर का निर्माण भी राहिल शरीफ की ही देखरेख में हो रहा है।
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अयूब खां ने खुद को दी थी फील्ड मार्शल की पदवी
गौरतलब है कि पाकिस्तान में अब तक महज अयूब खां को ही फील्ड मार्शल की पदवी मिली थी। वह भी उन्होंने सत्ता हथिया कर खुद ही ली थी। यदि शरीफ को फील्ड मार्शल बनाया जाता है तो पाकिस्तान के इतिहास में यह दूसरा मौका होगा जब किसी जनरल को इसकी उपाधि दी जाएगी। यहां एक बात और गौर करने वाली यह भी है कि राहिल शरीफ का कार्यकाल इस माह के अंत में खत्म हो रहा है।
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कार्यकाल बढ़ने की संभावना कम
हालांकि उनके कार्यकाल को बढ़ाने की भी कोई संभावना नहीं है। यदि उनके कार्यकाल को बढ़ाया नहीं गया तो यह भी बीते दो दशकों में पहला मौका होगा कि जब किसी जनरल को और वक्त न दिया गया हो। इससे पहले जनरल परवेज मुशर्रफ और उनके बाद के एक अन्य जनरल का कार्यकाल बढ़ाया गया था। उनके कार्यकाल के दौरान पीओके में भारतीय कमांडो द्वारा की गई सर्जिकल स्ट्राइक के बाद जनरल राहिल पर काफी दबाव भी है। वहीं इस दौरान सेना और सरकार के बीच आई खटास की खबरों के चलते भी वह चर्चा में रहे हैं।

