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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 03, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

ईरान परमाणु समझौते पर ओबामा, नेतन्याहू में विवाद

By Sachin kEdited By:
Updated: Tue, 03 Mar 2015 06:23 PM (IST)

इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की अमेरिकी यात्रा को लेकर विवाद बढ़ता ही जा रहा है। ईरान परमाणु समझौते को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा व नेतन्याहू के बीच के मतभेद उजगार हो गए। अमेरिकी कांग्रेस में नेतन्याहू के ऐतिहासिक संबोधन से एक दिन पहले सोमवार को दोनों नेताओं के बीच

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वाशिंगटन। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की अमेरिकी यात्रा को लेकर विवाद बढ़ता ही जा रहा है। ईरान परमाणु समझौते को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा व नेतन्याहू के बीच के मतभेद उजगार हो गए। अमेरिकी कांग्रेस में नेतन्याहू के ऐतिहासिक संबोधन से एक दिन पहले सोमवार को दोनों नेताओं के बीच इस मसले पर जुबानी जंग देखने को मिली।

ओबामा ने कहा कि इस मामले में नेतन्याहू पूर्व में गलत रहे हैं और उनकी योजना ईरान के खतरे को रोकने का सर्वश्रेष्ठ तरीका है। इससे पहले नेतन्याहू ने कहा था कि तेहरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को कम करने को लेकर अमेरिका व ईरान के बीच समझौता 'इजरायल के अस्तित्व' के लिए खतरनाक हो सकता है।

ठेस पहुंचाने के लिए दौरा नहीं

नेतन्याहू ने इजरायल समर्थक लॉबी एआइपीसीसी के वार्षिक सम्मेलन में हजारों कार्यकर्ताओं के सामने कहा कि कांग्रेस में उनका संबोधन ओबामा या उनके पद को किसी प्रकार से ठेस पहुंचाने के लिए नहीं है। कांग्रेस के स्पीकर जॉन बोहनर के निमंत्रण पर नेतन्याहू अमेरिका आए। रिपब्लिकन पार्टी के बहुमत वाली कांग्रेस ओबामा की ईरान नीति के खिलाफ है। इसके कारण ह्वाइट हाउस उनके दौरे से नाराज है और ओबामा, नेतन्याहू के बीच मुलाकात भी नहीं होगी।

नए प्रतिबंध नहीं लगाने के पक्ष में राइस

अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार सुसैन राइस ने कांग्रेस से ईरान पर नए प्रतिबंध नहीं लगाने की अपील की। उन्होंने कहा कि ऐसा करने से तेहरान के परमाणु कार्यक्रम पर चल रही बातचीत पटरी से उतर सकती है।

तेहरान ने मांग ठुकराई

10 साल के लिए परमाणु कार्यक्रम को रोकने की अमेरिका की मांग मंगलवार को ईरान ने ठुकरा दी। समाचार एजेंसी फार्स ने ईरानी विदेश मंत्री मोहम्मद जावद जरीफ के हवाले से यह जानकारी दी। दूसरी ओर, परमाणु समझौते से पहले आपसी मतभेदों को दूर करने के लिए स्विट्जरलैंड के मॉन्ट्रो में ईरान व अमेरिका के बीच बातचीत भी शुरू हो गई।

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