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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 30, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

जलवायु सम्मेलन से इतर पीएम मोदी की बराक ओबामा से हुई मुलाकात

By Kamal VermaEdited By:
Updated: Mon, 30 Nov 2015 08:41 PM (IST)

फ्रांस की राजधानी पेरिस में चल रहे जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (UN Climate Change Conference 2015) इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से मुलाकात की। ऐसा माना जा रहा है कि इस बातचीत में द्विपक्षीय संबंधों सहित और कई मसलों पर बात हुई होगी।

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पेरिस। फ्रांस की राजधानी पेरिस में चल रहे जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (UN Climate Change Conference 2015) इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से मुलाकात की। ऐसा माना जा रहा है कि इस बातचीत में द्विपक्षीय संबंधों सहित और कई मसलों पर बात हुई होगी। मोदी और ओबामा की ये सातवीं मुलाकात थी। इस दौरान दोनों नेता जलवायु परिवर्तन और आतंकवाद के मुद्दे पर भी विचार साझा किए गए। इसके अलावा दोनों देशों के बीच संबंधों को और अधिक मजबूत करने पर भी चर्चा की गई।

इससे पहले पीएम ने फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलंद से भी मुलाकात की थी।

इससे पहले जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में हिस्सा लेने गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वहां पर बने पैवेलियन का भी उदघाटन किया। इस मौके पर उनके साथ पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर भी मौजूद थे।

इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया के सामने ये साफ कर दिया कि ग्लोबल वार्मिंग हमारी देन नहीं है। उन्होंने कहा कि हम तो प्रकृति को माता समझते हैं ऐसे में भारत के ऊपर ये आरोप लगाना ठीक नहीं। पीएम ने कहा कि भारत कूड़े से ऊर्जा बनाने की दिशा में योजना बना रहा है। साथ ही क्लीन एनर्जी के क्षेत्र में काम करने का भी प्रयास किया जा रहा है।

मोदी ने कहा कि ग्लेशियर का पिघलना दुनिया के लिए बेहद चिंताजनक बात है। ऐसी स्थिति में जलवायु परिवर्तन पर पूरे विश्व तुरंत कर्रवाई करना चाहिए ताकि इस चुनौती से डटकर मुकाबला किया जा सके।

पीएम ने आगे कहा कि आज हमारे विकास पर पूरी दुनिया की नजर है। कार्बन उत्सर्जन को घटना भारत का लक्ष्य है। उन्होंने ये भी कहा कि जलवायु परिवर्तन हमारे किसानों के लिए बेहद खतरनाक है।

मोदी ने आगे कहा कि मानवता और प्रकृति में संतुलन जरुरी। जलवायु परिवर्तन पूरी दुनिया के लिए चुनौती। आज हम खुद इस जलवायु परिवर्तन के परिणाम भुगत रहे हैं।

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