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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 15, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

जी-20 नेताओं में मोदी सबसे चहेते

By Rajesh NiranjanEdited By:
Updated: Sun, 16 Nov 2014 12:58 AM (IST)

यहां चल रही जी-20 की बैठक में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सबसे चहेते नेता के तौर पर उभरे हैं। उनके चाहने वालों में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा भी हैं, जो उनके साथ ठहाके लगाते नजर आए। यह फोटो ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री टोनी एबॉट ने ट्विटर पर पोस्ट कर दिया। दोपहर

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ब्रिस्बेन। यहां चल रही जी-20 की बैठक में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सबसे चहेते नेता के तौर पर उभरे हैं। उनके चाहने वालों में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा भी हैं, जो उनके साथ ठहाके लगाते नजर आए। यह फोटो ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री टोनी एबॉट ने ट्विटर पर पोस्ट कर दिया। दोपहर भोज में मोदी रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन और एबॉट से बतियाते रहे। दूसरी तरफ गार्जियन अखबार ने एक लेख में लिखा है कि जी-20 में मोदी सबसे लोकप्रिय व्यक्तित्व हैं। वे एक ऐसे नेता हैं, जिन्हें दूसरे नेता देखना चाहते हैं और उनके साथ दिखना चाहते हैं।

गले मिले मोदी-एबॉट

जी-20 सम्मेलन स्थल पर जाते समय मोदी और टोनी एबॉट ने गले लगाकर एक-दूसरे का अभिवादन किया। सम्मेलन स्थल के लिए जाते समय सभी नेताओं का एबॉट हाथ मिलाकर अभिवादन कर रहे थे। इसी क्रम में जब भारतीय प्रधानमंत्री उनके पास पहुंचे तो दोनों नेताओं ने पहले हाथ मिलाया और फिर गले मिले। मोदी के अलावा एबॉट ने और किसी नेता से गले मिलकर अभिवादन नहीं किया। इससे पहले अगस्त में जब मोदी जापान यात्रा पर गए थ, तो सख्त माने जाने वाले जापानी प्रधानमंत्री शिंजो एबे ने भी उन्हें गले लगाकर अभिवादन किया था।


वाल्टर ग्रिफिन साझा कड़ी

प्रधानमंत्री मोदी ने बराक ओबामा और टोनी एबॉट से बातचीत के दौरान अमेरिकी वास्तुकार वाल्टर ग्रिफिन को भी याद किया और उन्हें भारत-अमेरिका और आस्ट्रेलिया के बीच साझा कड़ी बताया। ग्रिफिन आस्ट्रेलिया की राजधानी कैनबरा के वास्तुकार थे और जीवन के अंतिम महीने उन्होंने भारत में गुजारे। आस्ट्रेलिया में रहने के दौरान ग्रिफिन को लखनऊ विश्वविद्यालय में पुस्तकालय का नक्शा बनाने का निमंत्रण मिला और वे भारत आ गए। यहां आने के बाद वास्तु योजना के लिए उनकी मांग बढ़ती गई। 15 महीने भारत में रहने के बाद 1937 में लखनऊ के किंग जार्ज अस्पताल में उनकी मौत हो गई और इसी शहर में उन्हें दफना दिया गया।

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