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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 17, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

NSG पर अमेरिका के बाद ब्रिटेन भी भारत का साथ देने को राजी

By Sanjeev TiwariEdited By:
Updated: Sat, 18 Jun 2016 06:13 AM (IST)

ब्रिटिश के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने नरेंद्र मोदी से फोन पर बात की और इस बात का भरोसा दिलाया की वह एनएसजी में भारत का समर्थन करेगा।

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लंदन (पीटीअाई)। न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप (एनएसजी) में भारत की सदस्यता के लिए ब्रिटेन भी साथ देने के लिए राजी हो गया है। ब्रिटिश के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने नरेंद्र मोदी से फोन पर बात की और उन्हें इसका भरोसा दिलाया।

अमेरिका पहले ही दूसरे देशों से भारत को सपोर्ट करने की वकालत कर चुका है। बता दें कि 48 देशों के ग्रुप एनएसजी की मीटिंग 20 से 24 जून के बीच साउथ कोरिया में होगी। इसी में भारत के बारे में फैसला हो सकता है। चीन इसके खिलाफ और वह पाकिस्तान को भी ग्रुप में शामिल कराने की बात कह रहा है।

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डाउनिंग स्ट्रीट के प्रवक्ता ने बताया कि पीएम कैमरन ने भारत के प्रधानमंत्री मोदी से एनएसजी की सदस्यता को लेकर बातचीत की है। ब्रिटिश प्रवक्ता ने बताया कि पीएम कैमरन ने इस बात का भरोसा दिलाया है कि ब्रिटेन एनएसजी सदस्यता के लिए भारत का समर्थन करेगा।

दोनों नेताअों ने सहमति जताई की अावेदन की सफलता के लिए भारत को परमाणु हथियारों में कमी के प्रति प्रयास जारी रखने होंगे। इसके अतिरिक्त सैन्य अौर असैन्य परमाणु उद्देश्यों में अंतर बनाए रखना होगा।

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प्रवक्ता ने कहा कि उन्होंने इस बात को माना कि ब्रिटेन-भारत संबंध मजबूत हो रहे हैं जिसके कारणों में ब्रिटेन के राजकुमार प्रिंस विलियम और उनकी पत्नी कैट की हालिया भारत यात्रा भी शामिल है। एनएसजी की सदस्यता के लिए भारत के प्रयास को अमेरिका से भी बल मिला है जिसने अन्य सदस्यों को पत्र लिखकर 24 जून को सोल में आयोजित होने वाले समूह के पूर्ण सत्र में भारत के प्रयास का समर्थन करने को कहा है।

जहां इस प्रतिष्ठित समूह में से अधिकतर देशों ने भारत की सदस्यता का समर्थन किया है, वहीं चीन के साथ न्यूजीलैंड, आयरलैंड, तुर्की, दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रिया इसमें भारत के प्रवेश के पक्षधर नहीं हैं। चीन भारत के प्रवेश पर यह दलील देकर विरोध दर्ज करा रहा है कि उसने परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्ताक्षर नहीं किये हैं। चीन चाहता है कि अगर एनएसजी भारत को किसी तरह की छूट देता है तो उसके करीबी सहयोगी पाकिस्तान को भी सदस्यता प्रदान की जाए।

भारत इस बात पर जोर दे रहा है कि एनएसजी में शामिल होने के लिए एनपीटी पर हस्ताक्षर करना जरूरी नहीं है। भारत ने इस बाबत फ्रांस का उदाहरण देते हुए कहा कि इस तरह की मिसाल पहले भी देखने को मिली है।भारत एनएसजी में प्रवेश के लिए समूह के सदस्य देशों से संपर्क साध रहा है। एनएसजी आम-सहमति के सिद्धांत के तहत काम करता है और भारत के खिलाफ एक भी देश का वोट उसके प्रयास को बाधित कर सकता है।

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