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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 09, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

भारत के दबाव का असर, US में पाक राजदूत ने कहा-युद्ध नहीं है विकल्प

By Rajesh KumarEdited By:
Published: Sun, 09 Oct 2016 11:54 AM (IST)Updated: Sun, 09 Oct 2016 02:56 PM (IST)

अमेरिका में पाक राजदूत ने कहा कि इस्लामाबाद ऐसा मानता है कि कश्मीर समेत सभी द्विपक्षीय विवादों का हल बातचीत के जरिए किए जाने की जरूरत है।

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वाशिंगटन, प्रेट्र। पाकिस्तान के एक शीर्ष राजनयिक ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने कहा कि इस्लामाबाद ऐसा मानता है कि सभी कश्मीर समेत सभी द्विपक्षीय विवादों का हल बातचीत के जरिए किए जाने की जरूरत है।अमेरिका में पाक राजदूत ने कहा कि इसमें शक नहीं कि दोनों देशों में तनाव अपने चरम पर है। लेकिन युद्ध विकल्प नहीं है।

'युद्ध नहीं है समाधान'

वर्ल्ड बैंक और इंटरनेशनल मोनेट्री फंड की वार्षिक बैठक से इतर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान अमेरिका में तैनात पाकिस्तान के राजदूत जलील अब्बास जिलानी ने कहा कि दोनों देशों को इस सच्चाई को मानना होगा कि ऐतिहासिक समस्याओं का समाधान वो खुले दिमाग से बातचीत के जरिए सुलझा सकते हैं। उन्होंने कहा कि खासकर, दो परमाणु संपन्न देशों के बीच युद्ध नहीं होना चाहिए।”

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'विकास ही है सिर्फ रास्ता'

जिलानी ने कहा कि विकास के जरिए ही हम समस्याओं को सुलझा सकते हैं। दोनों देशों को आर्थिक विकास के रास्ते पर तेजी से आगे बढ़ने की आवश्यकता है। इसके लिए न केवल सरकारी स्तर पर बल्कि भारत और पाकिस्तान की अवाम को भी आगे आना होगा।

जिलानी ने आगे कहा, “युद्ध के बारे में सोचना भी अकल्पनीय है। इसलिए, पाकिस्तान सरकार की यह सोच है कि कश्मीर समेच सभी मुद्दों का हल अंतरराष्ट्रीय वैधता के तहत बातचीत के साथ किया जाना चाहिए।”

बलूचिस्तान में पाक का विरोध

पाकिस्तान में बलूच नागरिकों का विरोध तेज होता जा रहा है। आज पाकिस्तान के क्वेटा के पास बलूचिस्तान के लोगों ने विरोध- प्रदर्शन किया। ये लोग चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर का विरोध कर रहे थे। प्रदर्शन में भाग लेने वाले लोगों ने पाकिस्तान से आजादी के नारे लगाए और चीन के दखल का विरोध किया। इन लोगों ने नवाज शरीफ के पुतले और पोस्टर जलाए।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अपने संबोधन में लाल किले से बलूचिस्तान का मुद्दा उठाय था। पीएम मोदी ने अपने भाषण में बलूचिस्तान, गिलगित और पाक के कब्जे वाले कश्मीर में लोगों पर हो रहे अत्याचार का भी जिक्र किया था।

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