यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 15, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
औलाद न होने के विवाद में पत्नी की गला दबाकर हत्या, फिर खुद लगाया फंदा
औलाद न होने पर पति-पत्नी में विवाद हो गया। आरोप है कि पति ने पत्नी की गला दबाकर हत्या कर दी। बाद में उसने खुद भी फंदा लगाकर जान दे दी।

जेएनएन, लुधियाना। औलाद न होने को लेकर शुक्रवार देर रात पति-पत्नी में झगड़ा हुआ तो शनिवार सुबह पति ने पत्नी की गला दबाकर हत्या कर दी। इसके बाद खुद फंदा लगाकर जान दे दी। सुबह जब पड़ोसी ने दरवाजा खटखटाया तो नहीं खुला। इसके बाद पड़ोसी और रिश्तेदार दरवाजा तोड़कर अंदर गए तो देखा कि दोनों मृत पड़े हैं। इसकी सूचना पुलिस को दी।
मृतका के भाई पांड्या ने बताया कि अमरनाथ (40) और माला (45) दंपति महाराष्ट्र के जिला शोलापुर गांव इखतपुर के थे। 20 साल पहले दोनों की शादी हुई थी, लेकिन उनके कोई औलाद नहीं थी। दोनों गाय लेकर घूमते थे और दान इकट्ठा करते थे। पिछले काफी समय से वे ग्यासपुरा के सरकारी फ्लैट नंबर 1135 में रहते थे। औलाद न होने से भी घर में अक्सर झगड़ा होता था। 15 दिन पहले दोनों करनाल में गो दान लेने के लिए गए थे और शुक्रवार शाम को घर लौटे थे।
शनिवार सुबह उन्हें पड़ोसी का फोन आया कि उनकी बहन के घर का दरवाजा बंद है, शायद कुछ गलत हुआ है। यह सुनते ही वह बहन के घर पहुंचे और लोगों की मदद से जब दरवाजा तोड़ कर अंदर गए तो देखा कि उसकी बहन माला जमीन पर गिरी हुई थी और उसकी मौत हो चुकी थी। वहीं दरवाजे के पीछे उसका जीजा गिरा था, उसके गले में रस्सी थी और वह भी मर चुका था। फिर उन्होंने पुलिस को सूचना दी। इस बीच डा. राज कुमार कौड़ा ने दोनों का पोस्टमार्टम किया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला कि माला की मौत उसके पति की मौत से एक घंटे पहले हुई।
थाना शिमलापुरी प्रभारी सुरिंदर चोपड़ा ने कहा कि पति ने पहले पत्नी की गला दबाकर हत्या की और फिर खुद फंदा लगाकर जान दी। भाई के बयान पर धारा 174 के तहत कार्रवाई की गई है। ऐसा लगता है कि घरेलू कलह के चलते ये सारा कुछ हुआ है।
मामला संदिग्ध दिख रहा
मृतका के भाई के मुताबिक माला कमरे में जमीन पर गिरी थी। उसके कपड़े अस्त-व्यस्त थे और नाक से खून निकल रहा था। वहीं दरवाजे के पीछे अमरनाथ का शव पड़ा था, उसके हाथों पर रस्सी लिपटी हुई थी और कुछ रस्सी छाती पर पड़ी थी। उसकी जीभ दांतों में दबी थी। घर का सामान भी बिखरा था। कुछ जूते-चप्पल कमरे से बाहर और कुछ अंदर गिरे थे। वहीं माला के शव के पास एक खिड़की खुली हुई थी। खिड़की में जाली नहीं था, जिससे कोई आदमी अंदर बाहर आ-जा सकता है।
