यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 09, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
एयरटेल के आंकड़ें गुमराह करने वाले, 53 प्रतिशत तक जिओ कॉल्स अब भी होती हैं ड्रॉप: रिलायंस
जिओ की तरफ से जारी किए गए आंकड़ों में यह साफ है कि अभी भी कॉल ड्रॉप की समस्या में कोई खास कमी नहीं आई है ...और पढ़ें

नई दिल्ली। देश की दो बड़ी टेलिकॉम कंपनी एयरटेल और रिलायंस जिओ कॉल ड्रॉप मामले को लेकर एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। इसी बीच रिलयांस जिओ ने कॉल ड्रॉप के आंकड़े पेश किए हैं, जिसमें कम प्वाइंट ऑफ इंटरकनेक्ट यानि PoI मिलने से यूजर को खराब अनुभव का सामना करना पड़ रहा है। जिओ की तरफ से जारी किए गए आंकड़ों में यह साफ है कि अभी भी कॉल ड्रॉप की समस्या में कोई खास कमी नहीं आई है।
नीचे दिखाए गए आंकड़ों से यह पता चलता है कि समान सर्किल में जिओ और एयरटेल के बीच आउटगोइंग कॉल ड्रॉप का रेट 31 जनवरी 2017 तक मात्र 0.6 फीसदी कम हुआ है। वहीं, 30 सितंबर 2016 के आंकड़ों पर गौर करें तो यह 59.1 फीसदी था। अगर नेशनल लॉग डिस्टेंस की बात की जाए, तो 31 जनवरी 2017 तक कॉल ड्रॉप का रेट 53.4 फीसदी था। जो कि 30 सितंबर 2016 तक 29.4 फीसदी था।

ट्राई के मुताबिक, टेलिकॉम कंपनियों, दूसरे ऑपरेटर को लाइसेंस एग्रीमेंट के अंदर PoI मुहैया कराने के लिए बाध्य हैं। दो नेटवर्क्स के बीच में कॉल ड्रॉप का रेट 0.5 फीसदी से कम नहीं होना चाहिए। इन आंकड़ों के आधार पर ये साफ है कि कॉल ड्रॉप के मामलों में बेहद धीमी गति से सुधार हो रहा है।
इससे पहले जिओ और एयरटेल एक दूसरे पर आरोप लगाते नजर आए थे। भारती एयरटेल ने मुताबिक, उसने जिओ को जरुरी POI दिए हैं। ये POI जिओ को उसके द्वारा दिए गए कस्टमर ग्रोथ प्रोजेक्शन को ध्यान में रखकर दिए गए हैं। आपको बता दें कि एयरटेल ने जिओ को 19 करोड़ यूजर्स के लिए POI दिए हैं, जो कि कंपनी के मौजूदा 7.25 करोड़ यूजर्स से दोगुने हैं। ऐसे में एयरटेल ने कहा है कि जिओ को दिए जा रहे पीओआई का वह बेहतर तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पा रही है।
खबरें और भी
वहीं, जिओ ने एयरटेल के सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। जिओ के मुताबिक, एयरटेल POI से लोगों को गुमराह कर रही है। एयरटेल जिओ को पर्याप्त POI मुहैया नहीं करा रही है। इसकी वजह से 53.4 फीसदी लॉन्ग डिस्टेंस कॉल फेल हो रही हैं। जिओ ने कहा कि हर दिन 2.6 करोड़ से ज्यादा कॉल फेल हो रही हैं, जबकि ट्राई के नियमों के मुताबिक यह 0.5 फीसदी से ज्यादा नहीं होना चाहिए।