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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 24, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    रिटेलर्स भी ऑनलाइन खरीद कर बेच रहे हैं सामान, ग्राहकों को नुकसान

    By Shilpa SrivastavaEdited By:
    Updated: Wed, 25 Oct 2017 04:18 PM (GMT+05:30)

    आज भी कई यूजर्स ऐसे हैं जो ऑफलाइन खरीदारी करना ज्यादा पसंद करते हैं। अगर आप भी इनमें से एक हैं तो आपको थोड़ा सावधान रहने की जरुरत है ...और पढ़ें

    रिटेलर्स भी ऑनलाइन खरीद कर बेच रहे हैं सामान, ग्राहकों को नुकसान
    रिटेलर्स भी ऑनलाइन खरीद कर बेच रहे हैं सामान, ग्राहकों को नुकसान

    नई दिल्ली (जेएनएन)। भारत में ऑनलाइन खरीदारी का चलन काफी बढ़ गया है। सब्जी से लेकर हैंडसेट तक ग्राहक घर बैठे ही ऑनलाइन ऑर्डर कर देते हैं। इस बढ़ते चलन में ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए अमेजन, फ्लिपकार्ट और पेटीएम मॉल जैसी ई-कॉमर्स कंपनियां कई ऑफर्स पेश करती हैं। ग्राहकों के अलावा इन ऑफर्स का बड़ा फायदा रिटेलर्स भी उठाते हैं। जानें कैसे:

    रिटेलर्स उठाते हैं फायदा:

    आज भी कई लोग ऐसे हैं जो ऑनलाइन सामान पर ज्यादा विश्वास नहीं करते और वो ऑफलाइन खरीदारी ही करना पसंद करते हैं। ऐसे ग्राहकों को रिटेलर्स से स्मार्टफोन खरीदने में काफी नुकसान झेलना पड़ता है और इसका फायदा रिटेलर्स को होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि रिटेलर्स डिस्काउंट के साथ ई-कॉमर्स वेबसाइट्स से स्मार्टफोन खरीदते हैं। इन स्मार्टफोन्स को रिटेलर्स मार्किट प्राइस पर ही ऑफलाइन ग्राहकों को बेच देते हैं। ऐसे में जिस डिस्काउंट का फायदा ग्राहक को होना चाहिए वो पूरा फायदा रिटेलर्स उठा लेते हैं।

    रिटेलर्स का यह तरीका बाजार के लिए खतरा:

    रिटेलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (RAI) ने छोटे रिटेलर्स के लाभ कमाने के इस तरीके को रिटेलर बाजार के लिए खतरा बताया है। छोटे रिटेलर्स सबसे ज्यादा FMCG प्रोडक्ट यानी डिटर्जेंट, साबुन, सॉस, चॉकलेट, जूस और स्नैक्स जैसी चीजों को ऑनलाइन खरीते हैं क्योंकि इनमें सबसे ज्यादा डिस्काउंट दिया जाता है। अगर आंकड़ों पर गौर किया जाए तो इस बार फेस्टिव सीजन के दौरान ऑनलाइन सेल्स में 20 फीसद की हिस्सेदारी रिटेलर्स की ही रही है।

    एक रिपोर्ट में पता चला है कि रिटेलर्स ऑनलाइन खरीदारी के लिए 5 से 10 लॉगइन का इस्तेमाल कर रहे हैं। RAI की मानें तो अगर यही स्थिति जारी रही तो ऑनलाइन मार्केट प्लेस में एक ऐसा मोनोपोली (एकाधिकारवाद) की स्थिति पैदा हो जाएगी जिसे तोड़ना काफी मुश्किल होगा। इस स्थिति के कारण ग्राहक उसी कीमत में सामान खरीदने पर मजबूर होंगे जो ऑनलाइन वेबसाइट तय करेंगी।

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