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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 21, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

आगरा में पूर्व सीएम अखिलेश के सपने पर चलेगी कुदाल

By amal chowdhuryEdited By:
Updated: Fri, 21 Apr 2017 11:01 AM (IST)

अखिलेश सरकार ने आगरा सहित अन्य शहरों में साइकिल ट्रैक बनवाए हैं, इन ट्रैकों को अब पानी निकासी के लिए तोड़ा जा सकता है।

आगरा में पूर्व सीएम अखिलेश के सपने पर चलेगी कुदाल
आगरा में पूर्व सीएम अखिलेश के सपने पर चलेगी कुदाल

आगरा (जागरण संवाददाता)। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के सपने साइकिल ट्रैक पर जल्द ही कुदाल चलने जा रही है, जिससे बारिश का पानी रोड से निकल सके। वहीं माल रोड में कई ऐसे स्थल हैं, जहां रोड संकरी है। इन स्थलों पर भी साइकिल ट्रैक को तोड़ा जा सकता है।

अखिलेश सरकार ने आगरा सहित अन्य शहरों में साइकिल ट्रैक बनवाए हैं। आगरा में दो साल पूर्व अवंतीबाई से फूल सैयद चौराहे तक साइकिल ट्रैक बना था। दो किलोमीटर लंबे ट्रैक के निर्माण पर 1.30 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। ट्रैक की चौड़ाई दो मीटर और डिवाइडर से इसकी दूरी 10.30 मीटर है। लोक निर्माण विभाग के इंजीनियरों ने डिजायन में गड़बड़ी कर दी।

इस बात का ख्याल नहीं रखा गया कि माल रोड से बारिश का पानी किस तरीके से निकलेगा। रोड के दोनों किनारे बने ट्रैक की ऊंचाई बढ़ा दी गई। इसके चलते पिछले साल हुई बारिश का पानी नहीं निकल सका। इससे जगह-जगह रोड खराब हो गई। कमिश्नरी चौराहे से ठीक पहले डिवाइडर से ट्रैक की दूरी नौ मीटर के करीब है। सूत्रों के अनुसार शासन ने ट्रैक के निर्माण को लेकर रिपोर्ट मांगी है। लोक निर्माण विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि ट्रैक की डिजाइन में खामी रही है। जल्द ही इसे दूर किया जाएगा। ट्रैक के कुछ हिस्से को तोड़ा जा सकता है।

ट्रैक के बीच में हैं पेड़: माल रोड पर कई जगह ऐसी भी हैं जहां ट्रैक के बीचोंबीच पेड़ खड़े हैं। चालकों को ट्रैक से नीचे साइकिल उतारनी पड़ती है।

अधूरा छोड़ दिया ट्रैक: सहायक श्रम आयुक्त कार्यालय, बीएसएनएल ग्राउंड के सामने की दोनों लेन पर ट्रैक का निर्माण नहीं हुआ है। जगह-जगह मलबा पड़ा हुआ है।

साइकिल ट्रैक की हालत: सपा शासनकाल में साइकिल ट्रैक पर हर दिन झाड़ लगती थी। ट्रैक टूटने पर उसकी मरम्मत कराई जाती थी, लेकिन सरकार बदलने के बाद गंदगी फैली हुई है। जगह-जगह अतिक्रमण हो चुका है।

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लगातार चला था जागरूकता अभियान: साइकिल ट्रैक को लेकर जिला प्रशासन ने लगातार जागरूकता अभियान चलाया था, जिस पर लाखों रुपये खर्च हुए थे, लेकिन इसके बाद भी ट्रैक के बदले साइकिल सवार रोड का प्रयोग करते थे।

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