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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 09, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

पढ़ाई के दिनों में टीचरों से न ली जाए चुनाव ड्यूटी : हाईकोर्ट

By Ashish MishraEdited By:
Updated: Wed, 10 Aug 2016 10:24 AM (IST)

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि वह बच्चों की पढ़ाई के समय शिक्षकों से चुनाव संबंधी ड्यूटी न ले। अवकाश के दिनों में चुनावी ड्यूटी पर लगाया जा सकता है।

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इलाहाबाद (जेएनएन)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि वह बच्चों की पढ़ाई के समय शिक्षकों से चुनाव संबंधी ड्यूटी न ले। कोर्ट ने कहा है कि अवकाश के दिनों में अथवा उस समय जब टीचर पढ़ाई न करा रहा हो, उन्हें चुनावी ड्यूटी पर लगाया जा सकता है।

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यह आदेश मुख्य न्यायाधीश डीबी भोसले व जस्टिस यशवंत वर्मा की खंडपीठ ने यूपी प्राथमिक शिक्षक संघ, गाजियाबाद की जनहित याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है। शिक्षक संघ का कहना था कि अनिवार्य शिक्षा कानून-2009 के अन्तर्गत प्रत्येक बच्चे को शिक्षा ग्रहण का अधिकार है। यह तभी संभव है जब शिक्षक नियमित रूप से स्कूल में जाकर बच्चों को पढ़ाए।

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याचिका का विरोध करते हुए चुनाव आयोग के वकील ने कहा कि चुनाव ड्यूटी राष्ट्रीय कार्य है। शिक्षकों को इससे अलग नहीं रखा जा सकता। कहा गया कि बच्चों की पढ़ाई स्कूलों में बाधित न हो, इसका चुनाव आयोग ने पूरा ध्यान रखा है। कोर्ट को बताया गया कि शिक्षकों से अवकाश के दिनों में ही चुनाव ड्यूटी लेने का आदेश जारी हुआ है। जजों ने याचिका को निस्तारित करते हुए कहा कि टीचर यह नहीं कह सकता कि उससे चुनाव संबंधी ड्यूटी न ली जाए। चुनाव एक राष्ट्रीय कार्य है।