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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 16, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

उत्तराखंड विस सत्रः ढैंचा बीज मामले में त्रिवेंद्र को क्लीनचिट

By BhanuEdited By:
Updated: Fri, 16 Jun 2017 04:48 PM (IST)

ढैंचा बीच खरीद में घोटाले के मामले में त्रिपाठी आयोग की रिपोर्ट पर तत्कालीन कृषि मंत्री एवं वर्तमान में सीएम त्रिवेंद्र रावत के साथ ही सचिव को क्लीन चिट दी गई है।

उत्तराखंड विस सत्रः ढैंचा बीज मामले में त्रिवेंद्र को क्लीनचिट
उत्तराखंड विस सत्रः ढैंचा बीज मामले में त्रिवेंद्र को क्लीनचिट

देहरादून, [राज्य ब्यूरो]: ढैंचा बीच खरीद में घोटाले के मामले में त्रिपाठी आयोग की रिपोर्ट पर सरकार की एक्शन टेकन रिपोर्ट, लोकायुक्त विधेयक व उत्तराखंड लोकसेवकों के वार्षिक स्थानांतरण विधेयकों को प्रवर समितियों की संस्तुतियों के साथ गुरुवार देर रात्रि सदन के पटल पर रखा गया। वहीं सदन की कार्यवाही देर रात्रि जारी रखने और कार्यसूची में शामिल किए बगैर त्रिपाठी आयोग की रिपोर्ट और उक्त विधेयक पटल पर रखने के विरोध में कांग्रेस विधायक वेल में धरने पर बैठे। विपक्ष के विरोध के बीच उत्तराखंड विनियोग विधेयक पारित हो गया। सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। 

सदन में पेश त्रिपाठी आयोग की रिपोर्ट में तत्कालीन कृषि मंत्री और सचिव को क्लीन चिट दी गई है। सरकार का आरोप है कि पूर्व सरकार ने जांच रिपोर्ट एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) चार बार कैबिनेट में आने के बावजूद इसे सदन में नहीं रखा। 

रिपोर्ट में कहीं भी तत्कालीन कृषि मंत्री और मौजूदा मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को आरोपी नहीं बनाया गया है। तत्कालीन सचिव कृषि भी इस मामले से बाहर आते नजर आ रहे हैं। 

दरअसल, वर्ष 2005-06 में कृषि विभाग ने प्रदेश में खरीफ की फसल को बढ़ावा देने के लिए ढैंचा बीज वितरण करने की योजना बनाई। इसके क्रम में तत्कालीन कृषि निदेशक ने योजना को मूर्त रूप देने के लिए विभाग को निर्देश जारी किए। 

इस दौरान ऊधमसिंह नगर, देहरादून व चंपावत में तकरीबन 15,000 कुंतल ढैंचा बीज की आवश्यकता बताते हुए टेंडर जारी कराए गए। आरोप यह लगे की यह टेंडर 60 फीसद से अधिक दर पर दिए गए। इसके बाद वर्ष 2010 में एक निजी कंपनी को बिना टेंडर प्रक्रिया अपनाए बीज आपूर्ति का भी ठेका दे दिया गया। 

मामले उछलने पर कांग्रेस सरकार ने इसकी जांच त्रिपाठी आयोग को सौंपी थी। 2014 में आयोग की ओर से रिपोर्ट सरकार को सौंपी गई। तब से अब तक इस मामले में सरकार ने एटीआर को सदन के पटल पर नहीं रखा था। एटीआर को सदन में रखने के बाद भाजपा इस मामले में कांग्र्रेस पर हावी नजर आ रही है। 

हालांकि, अभी विपक्ष का रुख इस मामले में सामने आना बाकी है। उधर, सरकार ने बहुप्रतीक्षित लोकायुक्त विधेयक और उत्तराखंड लोकसेवकों के लिए वार्षिक स्थानांतरण विधेयकों को प्रवर समिति की सिफारिशों के साथ सदन के पटल पर रख दिया। इन्हें अब आगामी विधानसभा सत्र में ही पारित कराया जाएगा। 

दरअसल, ये भाजपा के सत्ता में आते ही सौ दिन में लोकायुक्त और तबादला कानून बनाने का दबाव ही रहा कि जिसके चलते सरकार ने गुरुवार को आनन-फानन उक्त दोनों विधेयक प्रवर समितियों की सिफारिशों के साथ सदन के पटल पर रख दिए।  

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