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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 26, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    विभागों के कामकाज पर रहेगी सीएम की सीधी नजर

    By BhanuEdited By:
    Updated: Wed, 26 Jul 2017 09:03 PM (IST)

    ई गवर्नेंस को लेकर सरकार ने बड़ी छलांग लगाई है। अब मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत अपने कार्यालय में डैशबोर्ड से ही सभी विभागों और जिलों की समीक्षा कर सके ...और पढ़ें

    विभागों के कामकाज पर रहेगी सीएम की सीधी नजर
    विभागों के कामकाज पर रहेगी सीएम की सीधी नजर

    देहरादून, [राज्य ब्यूरो]: ई गवर्नेंस को लेकर सरकार ने बड़ी छलांग लगाई है। अब मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत अपने कार्यालय में डैशबोर्ड से ही सभी विभागों और जिलों की समीक्षा कर सकेंगे। खास बात ये है कि इस प्रणाली में सरकार की प्राथमिकताएं, उपलब्धियां, फ्लैगशिप कार्यकम, विभागों के परफॉरमेंस की स्टार रेटिंग और चैट बोर्ड होगा। यानी सचिवालय से लेकर जिलों तक किसी भी विभाग या अधिकारी ने लापरवाही बरती तो मुख्यमंत्री सीधे उसकी खबर ले सकेंगे। इसे ई-कैबिनेट की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। 

    सचिवालय में मुख्य सचिव एस रामास्वामी, अपर मुख्य सचिव ओमप्रकाश समेत विभागीय सचिवों के सामने मुख्यमंत्री की प्रभारी सचिव राधिका झा ने मुख्यमंत्री मॉनीटरिंग डैशबोर्ड का प्रस्तुतीकरण दिया। इस डैशबोर्ड से मुख्यमंत्री अपने निर्देशों का फॉलोअप कर सकेंगे। यह साफ्टवेयर एनआइसी व आइटीडीए ने विकसित किया है। 

    प्रस्तुतीकरण में बताया गया कि इसमें गाउंड लेवल का डेटा यानी जिलों, ब्लॉकों और गांवों से एकत्र डेटा रहेगा। मुख्य सचिव ने सभी विभागों को किसी सक्षम अधिकारी को मुख्यमंत्री डैशबोर्ड के लिए समन्वयक नामित करने के निर्देश दिए। 

    समन्वयक अपने विभागों से संबंधित डेटा अपडेट करेंगे। यह भी बताया गया कि इसमें ग्राफिक रिपोर्ट, दैनिक, मासिक रिपोर्ट, सबसे अधिक और सबसे कम परफॉरमेंस वाले जिलों की रिपोर्ट, विभागवार डेटा सीडिंग, विभागवार सेवाओं की रिपोर्ट, योजना के अनुसार भौतिक व वित्तीय प्रगति की रिपोर्ट रहेगी। 

    इस रिपोर्ट में कुछ गलत पाया गया तो उच्चाधिकारी के पास ऑटोमेटेड एसएमएस चला जाएगा। सूत्रों के मुताबिक इस व्यवस्था के जरिए ई कैबिनेट को जल्द धरातल पर भी उतारा जाएगा। हालांकि, मंत्रालयों को ऑनलाइन कैबिनेट एजेंडा भेजने की शुरुआत की जा चुकी है। सूत्रों के मुताबिक इसके लिए मंत्रियों को टैबलेट भी उपलब्ध कराने पर विचार चल रहा है।

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