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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 10, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    कांग्रेस पार्टी के निशाने पर आए उत्‍तराखंड के राज्यपाल

    By gaurav kalaEdited By:
    Updated: Mon, 10 Oct 2016 09:31 AM (IST)

    उत्तराखंड में सत्‍तारुढ़ कांग्रेस पार्टी महामहिम डा. केके पॉल से खासा नाराज हैं। राज्य आंदोलनकारियों को क्षैतिज आरक्षण के मामले में पार्टी ने राज्‍यपा ...और पढ़ें

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    देहरादून, [राज्य ब्यूरो]: उत्तराखंड में राज्य आंदोलनकारियों को दस प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण के मामले में राज्यपाल डॉ. केके पाल सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी के निशाने पर आ गए हैं। कांग्रेस के मुख्य प्रचार समन्वयक व राज्य सरकार में दायित्वधारी धीरेंद्र प्रताप ने राज्यपाल डॉ. पाल को उत्तराखंड विरोधी करार दिया है।
    उन्होंने आंदोलकारियों को आरक्षण संबंधी विधेयक लगभग एक वर्ष से राजभवन में लंबित होने पर कड़ी नाराजगी जताई। साथ ही, राज्यपाल को कार्यकाल पूरा होने से पहले ही उत्तराखंड से हटाए जाने की भी मांग की।
    एक बयान में राज्य आंदोलकारी सम्मान परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप ने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों को दस फीसद आरक्षण संबंधी विधेयक दो नवंबर 2015 को गैरसैंण में विधानसभा में पारित किया गया था।

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    राज्यपाल डॉ. पाल ने इस विधेयक को अब तक न तो मंजूरी दी और न वापस लौटाया। उन्होंने कहा कि राज्यपाल के इस रुख से वह बेहद क्षुब्ध हैं। लिहाजा, यदि राज्यपाल कार्यकाल पूर्ण होने से पहले ही देवभूमि से रुखसत हो जाएं, तो उन्हें बेहद खुशी होगी।
    उन्होंने देश में राज्यपाल की चयन प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि केंद्र सरकार द्वारा किसी व्यक्ति को राज्यपाल नियुक्त करने के दौरान यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि उक्त व्यक्ति राज्य के इतिहास व सरोकारों को जानता है या नहीं।

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    राज्यपाल डॉ. पाल एक ईमानदार पुलिस अधिकारी भी रहे हैं, जिसके लिए वह उनका सम्मान करते हैं। अलबत्ता, राज्यपाल पद पर रहते हुए वह राज्य आंदोलनकारियों को आरक्षण संबंधी विधेयक पर जिस तरह का रुख अपनाए हुए हैं, वह आंदोलनकारियों का अपमान व उपेक्षा है।
    आंदोलनकारी कुछ दिन पूर्व राष्ट्रपति से राज्यपाल को हटाने की मांग करने वाले थे। तब उन्होंने आंदोलनकारियों को रोका, मगर उक्त विधेयक पर राजभवन के रुख को देखकर वह भी मजबूर होकर राज्यपाल डॉ. पाल को उत्तराखंड से हटाने की इच्छा रखते हैं।
    धीरेंद्र प्रताप ने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री हरीश रावत से मिलकर राज्य आंदोलनकारियों को पेंशन दिलाने की भी अपील की थी, मगर अधिकारियों की लापरवाही इस पर भी भारी पड़ रही है। उन्होंने इस मामले में मुख्यमंत्री हरीश रावत व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय से हस्तक्षेप करने की अपील की।
    राजभवन में लंबित है बिल
    राज्य आंदोलनकारियों को दस प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण संबंधी विधेयक दो नवंबर 2015 को गैरसैंण में विधानसभा सत्र के दौरान पारित किया गया था। इसके बाद से उक्त बिल राजभवन में लंबित है।
    राज्यपाल ने इस विधेयक को अब तक न तो मंजूरी दी और न उसे वापस लौटाया। दरअसल, इस मामले में हाईकोर्ट में भी एक याचिका विचाराधीन है। माना जा रहा है कि उक्त बिल के संबंध में राजभवन भी हाईकोर्ट के फैसले का इंतजार कर रहा है।

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