यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 31, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
बंद हुए गंगोत्री धाम के कपाट, मुखवा पहुंची मां गंगा की डोली
चार धाम यात्रा के एक धाम गंगोत्री के कपाट विधि-विधान के साथ मुहूर्त साढ़े बारह बजे बंद कर दिए गए। सर्दियों के वक्त मां गंगोत्री की पूजा गंगा मंदिर म ...और पढ़ें

उत्तरकाशी, [जेएनएन]: चार धाम यात्रा अब अपने अंतिम पड़ाव पर है। शीतकाल के लिए उत्तराखंड के प्रसिद्ध चार धामों के कपाट बंद होने शुरू हो गए हैं। इसी क्रम में विधि-विधान के साथ उत्तरकाशी स्थित गंगोत्री धाम के कपाट बंद कर दिए गए और मां गंगा की डोली शीतकालीन प्रवास के मुखबा रवाना हो गई।
अब अगले छह माह देश-विदेश के श्रद्धालु मां गंगा के दर्शन मुखबा में कर सकेंगे। जबकि बदरीनाथ के कपाट 16 नवंबर को बंद किए जाएंगे।
दीपावली के दूसरे दिन अन्नकूट पर्व पर गंगोत्री धाम में सुबह साढ़े सात से नौ बजे के बीच उदय बेला पर पूजा अर्चना के बाद गंगा की भोग मूर्ति से मुकुट उतरा गया। इस बीच श्रद्धालुओं ने मां गंगा की भोग मूर्ति के दर्शन किए। इसके बाद दोपहर 12.30 बजे स्वाती नक्षत्र में कपाट बंद किए गए। इस दौरान तीर्थ पुरोहितों ने विशेष पूजा व गंगा लहरी का पाठ किया।
जैसे ही गंगा की डोली मंदिर परिसर से बाहर निकली तो माहौल भक्तिमय हो उठा। सेना के बैंड की धुन और पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ डोली मुखबा के लिए रवाना हुई। चंदोमति देवी के मंदिर में रात्रि विश्राम के बाद डोली मुखबा पहुंच चुकी है।
द्वितीय केदार मधमहेश्वर धाम के कपाट 22 नवम्बर को सुबह आठ बजकर 22 मिनट पर बंद होंगे। अपने चौथे पड़ाव में बाबा मधमहेश्वर की डोली भी ओमकारेश्वर मंदिर में पहुंचेगी।
इस अवसर पर गंगोत्री मंदिर समिति के अध्यक्ष मुकेश सेमवाल, सचिव सुरेश सेमवाल, विधायक विजयपाल सजवाण, पूर्व विधायक गोपाल रावत, सूरत राम नौटियाल, एसपी ददन पाल, बीआरओ कंपाडर एससी लूनिया और व्यापार मंडल अध्यक्ष सत्येंन्द्र सेमवाल मौजूद थे।