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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 04, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    उत्तरकाशी के प्रमुख घाटों को 'नमामि गंगें' में जगह नहीं

    By BhanuEdited By:
    Updated: Sun, 06 Nov 2016 04:30 AM (IST)

    'नमामि गंगे' योजना में पौराणिक और आध्यात्मिक महत्व वाले उत्तकाशी के असी गंगा-भागीरथी और वरुण गंगा-भागीरथी के संगम स्थल के घाट शामिल नहीं हैं। ...और पढ़ें

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    उत्तरकाशी, [जेएनएन]: उत्तरकाशी की खास पहचान गंगा के उत्तर दिशा में बहने के साथ यहां असी गंगा और वरुण गंगा के संगम स्थल भी हैं। बावजूद इसके 'नमामि गंगे' योजना में असी गंगा-भागीरथी और वरुण गंगा-भागीरथी के संगम स्थल के घाट शामिल नहीं हैं। जबकि, इन घाटों का पौराणिक ही नहीं, आध्यात्मिक महत्व भी है।
    'नमामि गंगे' योजना के तहत उत्तरकाशी में घाटों की मरम्मत, उनके सौंदर्यीकरण और पुनर्निर्माण के लिए 37 करोड़ की धनराशि स्वीकृत हुई है। घाटों की मरम्मत का कार्य सिंचाई विभाग को सौंपा गया है। जिन घाटों की दशा सुधरनी है, उनमें मणिकर्णिका घाट, जड़भरत घाट, मंगला घाट, केदार घाट, तिलोथ, नेताला, हीना व मनेरी के घाट शामिल हैं।

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    वहीं, उत्तरकाशी के दो सबसे महत्वपूर्ण घाटों गंगोरी (असी गंगा और भागीरथी) व बड़ेथी (वरुण गंगा और भागीरथी) के नाम इस योजना में हैं ही नहीं। जबकि, आपदा के दौरान इन दोनों घाटों को सबसे अधिक नुकसान पहुंचा था।
    विदित हो कि उत्तरकाशी में वरुण गंगा और भागीरथी के संगम स्थल बड़ेथी से पंचकोसी यात्रा शुरू होकर असी गंगा और भागीरथी के संगम स्थल पर विराम लेती है। हजारों की संख्या में श्रद्धालु इस यात्रा का हिस्सा बनते हैं। जबकि, इन्हीं घाटों की स्थिति सबसे खराब है।

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    इन घाटों की सुध लो सरकार
    भाजपा के जिलाध्यक्ष रामसुंदर नौटियाल ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर इन दोनों घाटों को नमामि गंगे योजना में शामिल कराने की मांग की है। ज्ञापन में बुद्धि सिंह पंवार, हरीश डंगवाल, जयवीर चौहान, विजयपाल मखलोगा, प्रकाश भट्ट, बालशेखर नौटियाल, देवेंद्र चौहान, देवराज राणा, ललिता सेमवाल, राधा पंवार आदि के हस्ताक्षर हैं।
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