पुरानी कार खरीदने वाले रहें सावधान, Odometer और GPS ट्रैकर से ऐसे हो रही है लाखों की ठगी
GPS Tracker Scam: पुरानी कार खरीदने या मैकेनिक को देने में सावधानी बरतें। धोखेबाज अब ओडोमीटर कम करने और GPS ...और पढ़ें


समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
ऑटो डेस्क, नई दिल्ली। आजकल पुरानी कार खरीदना-बेचना जितना आसान हो गया है उतना ही खतरा बढ़ गया है। जालसाज अब ऑनलाइन पोर्टल्स पर बहुत एक्टिव हैं। ये लोग अक्सर बहुत कम कीमत की लालच देते हैं और आपकी मजबूरी का फायदा उठाकर आपको जल्दबाजी में पैसे देने या फैसला लेने पर मजबूर करते हैं।
ओडोमीटर बैक स्कैम
यह सबसे आम धोखा है जिसमें ठगने वाला मीटर से छेड़छाड़ कर 1 लाख किमी चली कार को सिर्फ 30-40 हजार किमी देखा जाता है जिससे गाड़ी महंगी बिके। इसके लिए हमेशा गाड़ी की सर्विस हिस्ट्री चेक करें। अगर मीटर रीडंग बहुत कम है लेकिन कार की टायर पूरी तरह घिस हुए हैं तो समझ जाइए कि स्कैम हुआ है।
दिखाते कुछ हैं बेचते कुछ और
ऑनलाइन बहुत दाम में चमचमाती कार का विज्ञापन दिखाया जाता है। जब आप खरीदने पहुंचते हैं तो बहाना बनाया जाता है कि वह गाड़ी बिक गई। लेकिन फिर आपको महंगी या खराब गाड़ी लेने के लिए मजबूर किया जाता है।
कार की चोरी का खेल
यह सबस डरावना खेल है। कुछ शातिर डीलर या प्राइवेट सेलर गाड़ी बेचने से पहले उसमें एक सीक्रेट ट्रैकर छिपा देते हैं। गाड़ी बेचने के कुछ दिनों बाद वे डुप्लीकेट चाबी और लोकेशन की मदद से आपकी गाड़ी आसानी से चोरी कर लेते हैं।
कागजों की होती है बाजीगरी
कई शातिर ठग चोरी की गाड़ियों के इंजन और चेसिस नंबर उन्हें असली कागजों के साथ बेच देते हैं। कई बार एक्सीडेंट में खत्म हो चुकी गाड़ियों की RC का इस्तेमाल दूसरी गाड़ियों के लिए किया जाता है। फिर बाद में पुलिस चेकिंग या Insurance के वक्त असली खरीदर बुरी तरह फंस जाता है।
हादसे वाली कार का मेकओवर
एक्सीडेंट या फिर बाढ़ में डूबी हुई कारों को बाहर से चमकाकर नई जैसी बताकर बेचा जाता है। ऐसी गाड़ियों के इंजन और तारों में अंदर ही अंदर जंग लग जाती है जो कुछ महीनों बाद खराब होकर भारी खर्चा कराती है।
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