भौकाल के चक्कर में कहीं भारी न पड़ जाए? एक्सीडेंट के आंकड़ों में क्यों सबसे आगे रहती हैं काले रंग की गाड़ियां!
भारत में हर रोज बड़ी संख्या में सड़क हादसे होते हैं। इन हादसों में कई कारें भी शामिल होती हैं। ...और पढ़ें

HighLights
काले रंग की गाड़ियां रात में कम दृश्यता के कारण खतरनाक
खराब मौसम में रोशनी सोखने से दिखना बेहद मुश्किल
गर्मी से ड्राइवर को थकान, जिससे ध्यान भटकने का खतरा
ऑटो डेस्क, नई दिल्ली। भारत में हर रोज हजारों की संख्या में सड़क हादसे होते हैं। इन हादसों में बड़ी संख्या में कारें भी शामिल होती हैं। हादसों के कई कारण होते हैं, जिनमें से एक कार गाड़ी का रंग भी हो सकता है। रंग के कारण हादसा होने का खतरा किस तरह से बढ़ सकता है। किस रंग की गाड़ी के साथ सबसे ज्यादा हादसा होने का खतरा होता है। हम आपको इस खबर में बता रहे हैं।
रोज होते हैं हादसे
देश में लापरवाही के कारण वाहन चलाने से लेकर दूसरे वाहन की गलती के कारण कई हादसे होते हैं। इन हादसों में बड़ी संख्या में कारें भी शामिल होती हैं।
रंग भी है कारण
हादसों के कारणों में से एक गाड़ी का रंग भी होता है। अक्सर एक ही रंग की कारों के साथ सबसे ज्यादा हादसे होते हैं। आमतौर पर काले रंग की कारों के साथ सबसे ज्यादा हादसे होते हैं।
क्या है कारण
काला रंग बैकग्राउंड में आसानी से घुल जाता है। रात के समय में सड़क पर काले रंग की गाड़ी को सुरक्षित दूरी से पहचान पाना भी मुश्किल हो जाता है। जिससे समय रहते हुए ऐसी गाड़ी को देखना आसान नहीं रहता।
खराब मौसम भी है कारण
काला रंग काफी आसानी से रोशनी को सोख लेता है। इसलिए खराब मौसम, धुंध, कोहरे और भारी बारिश के समय भी काले रंग की गाड़ी सड़क पर लगभग गायब हो जाती है।
जल्दी होती है थकान
काला रंग गर्मी को काफी तेजी से सोख लेता है। इसलिए सूरज की रोशनी में खड़ी होने पर काले रंग की कार का केबिन सफेद कार के मुकाबले पांच से सात डिग्री सेल्सियस ज्यादा गर्म हो जाता है। बहुत ज्यादा गर्मी के कारण ड्राइवर को जल्दी थकान और चिड़चिड़ाहटपन महसूस हो सकता है, जो लंबे सफर पर ध्यान भटकने का कारण भी बन जाता है।
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