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    क्या वाकई E20 पेट्रोल से खराब हो रही हैं पुरानी गाड़ियां, जानें क्या है इसपर सरकार का जवाब?

    Updated: Wed, 24 Jun 2026 12:30 PM (IST)

    E20 Fuel: भारत ने समय से पहले ही E20 का लक्ष्य पूरा कर लिया है। जहां सरतार इसे ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक बड़े कदम के तौर पर देख रही है तो वहीं पुरानी गा ...और पढ़ें

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    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    ऑटो डेस्क, नई दिल्ली। भारत सरकार ने साल 2003 में शुरू किए गए देश के Ethanol ब्लेंडिंग प्रोग्राम पर अपनी पूरी जानकारी दी है। सरकार ने कहा है कि यह प्रोग्राम वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित है और इस पर लगातार नजर रखी जाती है। बता दें कि, भारत ने समय से पगले ही अपन E20 लक्ष्यों को हासिल कर लिया है और अब सरकार इससे भी ज्यादा Ethanol ब्लेंडिंग की ओर कदम बढ़ा रही है।

    एक तरफ इस कदम को देश की ऊर्जा सुरक्षा की तरफ बड़ा कदम माना जा रहा है तो वहीं सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे भी शुरू हो गए हैं।

    सोशल मीडिया के दावे

    भारत सरकार ने सोशल मीडिया पर चल रह दावों पर भी ध्यान दिया है। सरकार ने कहा है कि पुरानी तस्वीरों और वीडियो को सोशल मीडिया पर दोबारा शेयर किया जा रहा है जिससे व्यूज बटोरे जा सके और Ethanol Blended Petrol को लेकर बिना वजह की चिंता पैदा की जा सके। हाल ही में, सोशल मीडिया पर एक फेक वीडियो शेयर किया गया था जिसमें कार के फ्यूल टैंक पर चीटियां जमा होती दिख रही थीं।

    खारिज की गलत जानकारी

    सरकार ने Social Media पर चल रहे ऐसे भ्रामक पोस्ट की बात स्वीकार कर कहा कि, इस कार्यक्रम को तकनीकी तैयारी और स्टेकहोल्डर्स के साथ बातचीत के आधार पर सही तरीके से लागू किया गया है जिसके बाद साल 2023 से 20 प्रतिशत E20 की शुरुआत हुई है। सरकार ऑयल मार्केटिंग कंपनियों, ऑटोमोबाइल निर्माताओं, फ्यूल टेस्टिंग एजेंसियों के साथ मिलकर इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम के लागू होने पर लगातार नजर रखती है।

    क्या E20 के नुकसान है?

    प्री BS-6 फेज-2 गाड़ियां या आसान शब्दों में अप्रैल 2023 से पहले बने वाहनों में E20 फ्यूल से दिक्कतें होने की संभावना ज्यादा होती है। इसी तरह, कार्बोरेटर इंजन वाली गाड़ियों या पुाने रबर और प्लास्टिक की फ्यूल लाइन्स वाे वाहनों में इसका खतरा ज्यादा हो सकता है। लोकल सर्कल्स द्वारा किए गए सर्वे में भी यह साबित होता है। इसके मुताबिक, पुरानी गाड़ी मालिकों में से 28 प्रतिशत ने असामान्य टूट-फूट और रिपेयर की जरूरत की बात स्वीकारी है।

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    पुरानी गाड़ियों पर असर

    इस सर्वे में देश के 331 जिलों के पेट्रोल वाहन मालिकों से 37,000 जवाब मिले। Ethanol काफी हद तक एक सॉल्वेंट और यह पुराने वाहनों में मेटल टैंक, फ्यूल लाइन्स और कार्बोरेटर को नुकसान पहुंचा सकता है। इसके अलावा, कई रिपोर्टों के मुताबिक पुराने फ्यूल होज, सील और गास्केट इथेनॉल को झेलने वाले नहीं होते हैं और वो E20 पेट्रोल से खराब हो सकते हैं।

    भारत क्यों दे रहा है जोर?

    भारत इस समय अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत से ज्यादा फ्यूल दूसरे देशों से इंपोर्ट करता है जिससे देश का विदेशी मुद्रा भंडार कम होता है। US-Iran Conflict की वजह से दुनिया भर में फ्यूल की सप्लाई चेन में भारी रुकावट आई है जिसने वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों को बढ़ा दिया है। दूसरी तरफ, Ethanol को खेती के कचरे से बनाया जा सकता है।

    भारत एक कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था है और पेट्रोल में Ethanol मिलाने से दूसरे लक्ष्यों को पूरा करके इसे और भी मजबूती दी जा सकती है जैसे कि कच्चे तेल की सप्लाई के लिए दूसरें देशों पर निर्भरता कम करना और ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन (Emission) को कम करना।

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