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    दुष्कर्म कर वीडियो से ब्लैकमेल, फिर शादी का झांसा; अररिया कोर्ट ने आरोपि‍त को 14 साल की सजा सुनाई

    Updated: Wed, 18 Mar 2026 02:01 AM (IST)

    अररिया कोर्ट ने दुष्कर्म और वीडियो ब्लैकमेल के मामले में फैजान को 14 साल के सश्रम कारावास और 53 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। आरोपी ने पीड़िता ...और पढ़ें

    अररिया में दुष्कर्म व ब्लैकमेल मामले में 14 साल की सजा, आरोपि‍त दोषी करार

    अररिया में दुष्कर्म व ब्लैकमेल मामले में 14 साल की सजा, आरोपि‍त दोषी करार

    HighLights

    1. फैजान को दुष्कर्म और ब्लैकमेल मामले में 14 साल की सजा।

    2. आरोपी ने वीडियो बनाकर पीड़िता का लगातार शोषण किया।

    3. अदालत का फैसला गंभीर अपराधों के खिलाफ कड़ा संदेश।

    संवाद सूत्र, अररिया। तीन वर्ष पूर्व एक युवती के साथ दुष्कर्म और ब्लैकमेल कर लगातार शोषण करने के मामले में अदालत ने सख्त फैसला सुनाया है। अररिया न्याय मंडल के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम मनोज कुमार तिवारी की अदालत ने पचैली गांव निवासी फैजान को दोषी करार देते हुए 14 वर्ष के सश्रम कारावास और 53 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना नहीं देने पर तीन महीने की अतिरिक्त सजा का प्रावधान भी रखा गया है।

    वीडियो बनाकर ब्लैकमेल का आरोप

    मामले में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, वर्ष 2023 में पीड़िता के साथ घटना उस समय हुई जब वह शौच के लिए बाहर गई थी। आरोपी ने उसे पकड़कर दुष्कर्म किया और घटना का वीडियो बना लिया। इसके बाद वीडियो वायरल करने की धमकी देकर उसे लगातार ब्लैकमेल किया गया। शादी का झांसा देकर आरोपी लंबे समय तक उसके साथ संबंध बनाता रहा, जिससे पीड़िता गर्भवती हो गई।

    अदालत में दोनों पक्षों की बहस

    इस मामले में अररिया महिला थाना में 13 मार्च 2023 को कांड संख्या 08/2023 दर्ज किया गया था। सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से एपीपी राजानंद पासवान ने घटना को गंभीर बताते हुए आरोपी के लिए कठोर सजा की मांग की। वहीं बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने कम सजा देने की अपील की। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आरोपी को भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं में दोषी ठहराया और सजा सुनाई।

    अन्य आरोपित हुए दोषमुक्त

    इस मामले में आरोपी के परिजन समेत छह अन्य लोगों को भी आरोपित बनाया गया था। हालांकि साक्ष्यों के अभाव में अदालत ने सभी को दोषमुक्त कर दिया। अदालत के इस फैसले को गंभीर अपराधों के खिलाफ कड़ा संदेश माना जा रहा है। यह निर्णय न केवल पीड़िता को न्याय दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि समाज में ऐसे अपराधों के प्रति सख्ती का संकेत भी देता है।

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