अररिया के नरपतगंज में दर्जनभर गांवों पर बाढ़ का खतरा, 40-50 हजार लोग हो सकते हैं प्रभावित
अररिया के नरपतगंज प्रखंड में मानसून के दौरान करीब दर्जनभर गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है, जिससे 40-50 हजार लोग प्रभावित हो सकते हैं।

अररिया के नरपतगंज में दर्जनभर गांवों पर बाढ़ का खतरा, 40-50 हजार लोग हो सकते हैं प्रभावित
HighLights
नरपतगंज के दर्जनभर गांवों पर बाढ़ का खतरा।
40-50 हजार लोग हो सकते हैं सीधे प्रभावित।
ग्रामीणों ने प्रशासन से पूर्व तैयारी की मांग की।
अजीत कुमार, फुलकाहा (अररिया)। मानसून के दौरान नरपतगंज प्रखंड के सीमावर्ती एवं नदी से सटे करीब दर्जनभर गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडराता रहता है। बेला, बसमतिया, बबुआन, पथराहा, मानिकपुर, भवानीपुर, लक्ष्मीपुर, अमरोरी, नवाबगंज, मिर्जापुर, मधुरा उत्तर और भंगही सहित आसपास के इलाकों में बाढ़ की स्थिति बनने पर करीब 40 से 50 हजार की आबादी प्रभावित हो सकती है।
इन गांवों के अधिकांश परिवारों की आजीविका कृषि, पशुपालन और मजदूरी पर निर्भर है। बाढ़ आने पर खेतों में पानी भरने के साथ ग्रामीण सड़कों एवं संपर्क मार्गों पर आवागमन प्रभावित हो जाता है। इससे लोगों को बाजार, अस्पताल, विद्यालय और प्रखंड मुख्यालय तक पहुंचने में परेशानी उठानी पड़ती है।
ग्रामीणों के अनुसार, पूर्व में भी बाढ़ के दौरान कई इलाकों में घरों और खेतों में पानी घुस चुका है। ऐसे समय में नाव ही कई गांवों के लिए आवागमन का प्रमुख सहारा बनती है। हालांकि, प्रभावित परिवारों के पास बाढ़ की स्थिति से निपटने के वैकल्पिक संसाधन सीमित हैं।
ग्रामीणों ने प्रशासन से बाढ़ पूर्व तैयारी तेज करने, संवेदनशील इलाकों में नाव एवं राहत सामग्री की व्यवस्था रखने और संपर्क मार्गों पर विशेष निगरानी की मांग की है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि समय रहते तैयारी होने से संभावित बाढ़ के दौरान जान-माल के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। नेपाल में बारिश की सूचना मिलते ही सीमावर्ती क्षेत्र के ग्रामीणों की नजरें स्थानीय नदियों और जलधाराओं के जलस्तर पर टिक जाती हैं।
लोगों को आशंका सताने लगती है कि यदि नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश का सिलसिला इसी तरह जारी रहा तो इसका सीधा असर सीमावर्ती इलाके की नदियों पर पड़ सकता है और देखते ही देखते जलस्तर बढ़ने से बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
नेपाल के कई हिस्सों में अभी भी बारिश और बाढ़ का असर पूरी तरह समाप्त नहीं होने की खबरों के बीच भारतीय सीमा से सटे ग्रामीण संभावित खतरे को लेकर लगातार सतर्क नजर आ रहे हैं।
नेपाल की बारिश पर निर्भर रहती है सीमावर्ती नदियों की स्थिति
नरपतगंज प्रखंड का उत्तरी एवं सीमावर्ती क्षेत्र भौगोलिक रूप से नेपाल के काफी करीब है। नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में होने वाली बारिश का असर यहां बहने वाली नदियों और छोटी-बड़ी जलधाराओं पर पड़ता है। नेपाल में बारिश तेज होने के बाद सीमावर्ती क्षेत्र में नदी के जलस्तर में अचानक वृद्धि होने की आशंका बनी रहती है।
ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के मौसम में नेपाल की ओर से आने वाले पानी के कारण क्षेत्र की नदियों का मिजाज कभी भी बदल सकता है। सामान्य स्थिति में बहने वाली नदियां अचानक उफान पर आ जाती हैं और निचले इलाकों में पानी फैलने लगता है। बाढ़ के कारण लोगों के घरों में पानी घुसने के साथ ही सड़क एवं संपर्क मार्ग प्रभावित हो जाते हैं।
बाढ़ का सबसे अधिक असर किसानों पर पड़ता है। खेतों में लगी फसलें पानी में डूबने से किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
नदी के जलस्तर में मामूली वृद्धि से बढ़ जाती है बेचैनी
सीमावर्ती ग्रामीणों का कहना है कि नेपाल में बारिश बढ़ने के साथ ही यहां संभावित बाढ़ को लेकर चिंता बढ़ जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ आने के बाद राहत और बचाव कार्य शुरू करने के बजाय यदि पहले से ही प्रशासन सतर्क रहे तो संभावित नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
प्रशासन से लगातार निगरानी और पूर्व तैयारी की मांग
नेपाल में लगातार हो रही बारिश को देखते हुए सीमावर्ती क्षेत्र के ग्रामीणों ने प्रशासन से नदियों के जलस्तर की लगातार निगरानी करने की मांग की है। ग्रामीणों ने निचले इलाकों की पहचान करने, संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ाने, आवागमन के रास्तों को दुरुस्त रखने तथा आवश्यकता पड़ने पर राहत एवं बचाव की व्यवस्था पहले से तैयार रखने की मांग की है।
प्रशासन की पूर्व तैयारी और समय पर सूचना ग्रामीणों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों का कहना है कि नेपाल में बारिश की खबर अब उनके लिए महज मौसम की सूचना नहीं रह गई है, बल्कि इसके साथ ही संभावित बाढ़ का डर भी जुड़ा रहता है।
क्या कहते हैं सीओ?
नरपतगंज सीओ संजीव कुमार ने बताया बाढ़ की तैयारी पूरी है। प्रशासन अपनी नजर बनाए हुए है। बाढ़ के हालातों में तुरंत एक्शन लिया जाएगा।
