सांप मारने पर कड़ा कानून, लेकिन पकड़ने के लिए अरवल में स्नेक कैचर नहीं; दहशत में जीने को मजबूर ग्रामीण
अरवल जिले में सर्पदंश से प्रतिवर्ष कई लोगों की जान जाती है, खासकर किसान और मजदूर वर्ग के लोग। जिले में एक भी प्रशिक्षित स्नेक कैचर न होने से ग्रामीण द ...और पढ़ें

अरवल में स्नेक कैचर नहीं
HighLights
अरवल में सर्पदंश से प्रतिवर्ष दर्जनों लोग गंवाते हैं जान।
जिले में एक भी प्रशिक्षित स्नेक कैचर उपलब्ध नहीं है।
जागरूकता के अभाव में लोग झाड़-फूंक के चक्कर में पड़ते हैं।
जागरण संवाददाता, अरवल। जिले में प्रति वर्ष दर्जनों लोग सर्पदंश के शिकार होकर अपना जान गवाते हैं इनमें ज्यादातर लोग किसान और मजदूर वर्ग के होते हैं। बरसात शुरुआत होते ही सदर अस्पताल में सर्पदंश के शिकार लोग प्रतिदिन अपना इलाज करने पहुंचते हैं।
चिकित्सकों के अनुसार समय से अस्पताल पहुंचने पर एंटी स्नेक वेनम दिया जाता है जिससे सांप काटने के शिकार लोगों को जान बच जाती है। समय से अस्पताल नहीं पहुंचने वाले लोगों के शरीर में जहर फैल जाता है एंटी स्नेक वेनम भी काम नहीं करता है ऐसी स्थिति में पीड़ित की मौत हो जाती है।
चार चार लाख की सहायता राशि उपलब्ध
वन विभाग के पास एक भी स्नेक कैचर नहीं होने से जिले के लोग दहशत में रहते हैं। जिला सहायक आपदा प्रबंधन पदाधिकारी गीतांजलि ने बताई की पिछले वर्ष 7 लोगों की मौत सर्पदंश के कारण जिले में हुआ था जिसमें 6 लोगों के परिजनों को चार चार लाख की सहायता राशि उपलब्ध करा दिया गया है।
इस वर्ष अब तक एक की मौत सर्पदंश से हुई है। इधर आम लोगों का मानना है कि जिलेभर में सांप काटने से प्रतिवर्ष 20 से अधिक लोगों की मौत होती है।
जागरूकता के अभाव में लोग अस्पताल नहीं पहुंच पाते हैं झाड फुंक के चक्कर में पड़ जाते हैं और मौत हो जाती है। पोस्टमार्टम नहीं होने के कारण सरकारी रिकॉर्ड में उनका नाम नहीं आता है जिसके कारण उनके परिजन मुआवजा से भी वंचित हो जाते हैं।
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जिले में एक भी स्नेक कैचर नहीं
जिले में एक भी स्नेक कैचर नहीं है जिसके कारण लोगों के घरों में जब सांप घुसते हैं तो वन विभाग को या फिर 112 नंबर पर लोग फोन करते हैं। वन विभाग के पास स्नेक कैचर नहीं होने से के कारण लोगों को परेशानी झेलनी पड़ती हैं।
एक तरफ सांप को वन्यजीव घोषित किया गया है जिसे मारने पर कड़े कानूनी करवाई का प्रावधान है दूसरी तरफ जिले में स्नेक कैचर नहीं रहने से जिनके घर में सांप घुसते हैं उन्हें मजबूरी में सांप को मारना पड़ता है।
आम लोगों को कहना है कि सरकार को मुआवजा देने में लाखों रुपया खर्च होता है लेकिन साँप से बचाव के लिए ना तो स्नेक कैचर है और ना ही कभी आम लोगों को जागरूक किया जाता है
सांप को वन जीव संरक्षण श्रेणी में रखा गया है इसे मारना अपराध है सांप पकड़ने वाला छड़ी सहित अन्य संसाधन उपलब्ध है लेकिन एक भी प्रशिक्षित स्नेक कैचर जिला में नहीं है। - एस के तिवारी वनपाल अरवल