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28 अगस्‍त को रक्षाबंधन: चंद्रग्रहण का भी संयोग; भारत में सूतक लगेगा या नहीं? शुभ मुहूर्त की यहां लें जानकारी

Updated: Mon, 17 Aug 2026 01:38 PM (IST)

इस वर्ष रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाया जाएगा, जिसमें राखी बांधने का शुभ मुहूर्त सुबह 5:28 बजे से 9:48 बजे ...और पढ़ें

28 अगस्‍त को मनाया जाएगा रक्षाबंधन। सांकेत‍िक तस्‍वीर

28 अगस्‍त को मनाया जाएगा रक्षाबंधन। सांकेत‍िक तस्‍वीर

HighLights

  1. रक्षाबंधन 28 अगस्त को, भद्रा बाधा मुक्त शुभ पर्व।

  2. राखी बांधने का शुभ मुहूर्त सुबह 5:28 से 9:48 बजे तक।

  3. चंद्रग्रहण भारत में अदृश्य, इसलिए सूतक मान्य नहीं होगा।

संवाद सहयोगी, कलेर (अरवल)। Rakshabandhan 2026: भाई-बहन के अटूट प्रेम, स्नेह और विश्वास का प्रतीक रक्षाबंधन पर्व इस वर्ष 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा।

श्रावण शुक्ल पूर्णिमा के अवसर पर बहनें भाइयों की कलाई पर रक्षा-सूत्र बांधकर उनके दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना करेंगी।

पंचांग गणना के अनुसार इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाएगी। राखी बांधने का शुभ मुहूर्त सुबह 5:28 बजे से 9:48 बजे तक रहेगा।

पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की सुबह करीब 9:08 बजे शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह 9:48 बजे तक रहेगी। शतभिषा नक्षत्र में पड़ रही पूर्णिमा के कारण इस दिन का धार्मिक महत्व भी विशेष माना जा रहा है। स्थानीय पंचांग के अनुसार समय में कुछ मिनट का अंतर संभव है।

प्रेम और रक्षा का प्रतीक है राखी

रक्षाबंधन केवल राखी बांधने की रस्म नहीं, बल्कि भाई-बहन के बीच प्रेम, विश्वास, जिम्मेदारी और परस्पर रक्षा की भावना को मजबूत करने वाला पर्व है।

बहन भाई की कलाई पर रक्षा-सूत्र बांधकर उसके मंगलमय जीवन की कामना करती है, जबकि भाई बहन की सुरक्षा, सम्मान और हर परिस्थिति में सहयोग करने का संकल्प लेता है। 

रक्षाबंधन की परंपरा भारतीय संस्कृति में प्राचीन मानी जाती है। धार्मिक ग्रंथों और लोकपरंपराओं में देवराज इंद्र की पत्नी शची द्वारा रक्षा-सूत्र बांधने तथा भगवान श्रीकृष्ण और द्रौपदी से जुड़ी कथा का उल्लेख मिलता है। 

राखी के दिन चंद्रग्रहण का भी संयोग

28 अगस्त को आंशिक चंद्रग्रहण का भी संयोग बन रहा है। इसकी अवधि भारतीय समयानुसार सुबह करीब 6:54 बजे से दोपहर 12:32 बजे तक बताई गई है।

हालांकि, यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। इसलिए भारतीय क्षेत्र में इसके कारण सूतक मान्य नहीं होगा। वैज्ञानिक संस्थानों की गणना के अनुसार भी यह ग्रहण भारत में अदृश्य रहेगा।

इधर, रक्षाबंधन को लेकर बाजारों में भी चहल-पहल बढ़ने लगी है। रंग-बिरंगी राखियों, मिठाइयों और उपहारों की खरीदारी को लेकर लोगों में उत्साह है। पर्व भाई-बहन के रिश्ते में स्नेह और विश्वास की डोर को और मजबूत करने का संदेश देता है।