औरंगाबाद के सरकारी स्कूल में शिक्षकों का अभाव, साइंस और आर्ट्स की पढ़ाई ठप
गोह प्रखंड के अपग्रेड हाई स्कूल बेनी कैथी में शिक्षकों की भारी कमी है, जिससे 155 छात्र-छात्राओं की शिक्षा प्रभावित हो रही है। ...और पढ़ें
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औरंगाबाद के सरकारी स्कूल में साइंस और आर्ट्स की पढ़ाई से वंचित बच्चे। फोटो जागरण

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संवाद सूत्र, उपहारा गोह (औरंगाबाद)। शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के तमाम दावों के बीच सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के पद रिक्त है। गोह प्रखंड के अपग्रेड हाई स्कूल बेनी कैथी में शिक्षकों के अभाव में शिक्षा पर ग्रहण लगा हुआ है।
विद्यालय में कुल 155 छात्र छात्राएं नामांकित हैं। आलम यह है कि संसाधनों और शिक्षकों के अभाव में छात्र गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से पूरी तरह वंचित हो रहे हैं। सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की चर्चा अक्सर गणित, विज्ञान और भाषा तक सिमट जाती है, जबकि बच्चों को सर्वांगीण विकास के लिए कला शिक्षा की भूमिका उतनी ही महत्वपूर्ण है।
विद्यालय में आर्ट्स शिक्षकों की नियुक्ति नहीं होने के कारण यह विषय हाशिए पर चला गया है। पाठ्यक्रम में शामिल होने के बावजूद चित्रकला की नियमित पढ़ाई पर शिक्षित शिक्षक और आवश्यक संसाधनों का अभाव बच्चों के रचनात्मक शिक्षा से वंचित कर रहा है। आर्ट्स और साइंस की पढ़ाई सबसे विकट स्थिति उच्च माध्यमिक और प्लस टू विद्यालयों की है।
कहने को तो यहां विज्ञान (Science) और कला (Arts) संकायों का नामांकन होता है। लेकिन धरातल पर इन्हें पढ़ाने वाले शिक्षक ही नहीं हैं। इस विद्यालय की छात्रा छोटी कुमारी, ज्योति कुमारी, कंचन कुमारी, पूनम कुमारी, रिया कुमारी, अंजू कुमारी, सोनी कुमारी, काजल कुमारी ने बताया की विद्यालय में चित्रकला विषय के शिक्षक के साथ-साथ भौतिक व रसायन शास्त्र के शिक्षक नहीं हैं।
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प्रधानाध्यापक मोहम्मद सिकेंदर आजम ने बताया कि विद्यालय में नौ से बारहवीं कक्षा के छात्र पढ़ने आते हैं।अभी 155 छात्रों का नामांकन किया गया है। शिक्षक के आभाव में पाठ्यक्रम में दिक्कत हो रही है।
विद्यालय की बुनियादी सुविधाओं का अभाव और शिक्षकों की कमी छात्रों की शिक्षा पर नकरात्मक प्रभाव डाल रही है। जिससे उनकी भविष्य की संभावनाएं प्रभावित हो रही है।इसके लिए प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी अशोक कुमार सिंह से शिकायत की है।
विषयवार शिक्षकों का अभाव
भौतिकी, रसायन शास्त्र और आर्ट्स जैसी महत्वपूर्ण विषयों के लिए शिक्षक न होने के कारण छात्र केवल परीक्षा फॉर्म भरने तक ही सीमित रह गए हैं।
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