अंधेरा था, मोबाइल की लाइट थी... फिर गूंजी नवजात की किलकारी व खिल उठे चेहरे, बिहार सरकारी अस्पताल की तस्वीर ने चौंकाया
औरंगाबाद के गोह पीएचसी में बिजली गुल होने से दो महिलाओं को मोबाइल की रोशनी में प्रसव कराना पड़ा। इस घटना ने सरकारी अस्पताल की लचर व्यवस्था और बुनियादी ...और पढ़ें

दो महिलाओं का कराया गया प्रसव
HighLights
गोह पीएचसी में बिजली गुल होने से प्रसव में बाधा।
मोबाइल की रोशनी में दो महिलाओं का सफल प्रसव।
अस्पताल की बुनियादी सुविधाओं पर गंभीर सवाल खड़े हुए।
संवाद सूत्र, गोह (औरंगाबाद)। गोह प्रखंड मुख्यालय स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर खामियां सामने आई हैं। रविवार देर रात बिजली गुल होने के कारण दो महिलाओं का प्रसव मोबाइल की रोशनी में कराना पड़ा।
घटना ने अस्पताल की बुनियादी सुविधाओं और आपातकालीन तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रसव के लिए भर्ती दोनों महिलाओं और उनके नवजातों की स्थिति फिलहाल सामान्य बताई जा रही है।
बावजूद इसके, अंधेरे में प्रसव कराए जाने की घटना लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।
दो महिलाओं का कराया गया प्रसव
जानकारी के अनुसार, निजामपुर निवासी अजीत यादव की पत्नी मुन्नी देवी और दुल्लह बिगहा निवासी राम दर्शन बिंद की पुत्री किरण देवी को प्रसव के लिए पीएचसी में भर्ती कराया गया था।
रात के समय प्रसव पीड़ा बढ़ने पर दोनों महिलाओं को प्रसव कक्ष में ले जाया गया। इसी दौरान अस्पताल की बिजली आपूर्ति बाधित हो गई, जिससे स्वास्थ्यकर्मियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
मोबाइल की लाइट बनी सहारा
बिजली नहीं रहने और इमरजेंसी लाइट के बंद होने के कारण स्वास्थ्यकर्मियों ने चार से पांच मोबाइल फोन की रोशनी का सहारा लेकर प्रसव कराया।
परिजनों का आरोप है कि करीब डेढ़ से दो घंटे तक प्रसव कक्ष अंधेरे में रहा। ऐसे हालात में स्वास्थ्यकर्मियों और मरीजों दोनों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
परिजनों ने जताई नाराजगी
प्रसूता महिलाओं के परिजनों ने अस्पताल की व्यवस्था पर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि सरकारी अस्पताल में बिजली और इमरजेंसी लाइट जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव चिंताजनक है।
परिजनों ने कहा कि प्रसव जैसी संवेदनशील प्रक्रिया के दौरान अंधेरे की स्थिति मरीजों के लिए जोखिम भरी साबित हो सकती थी। हालांकि राहत की बात यह रही कि दोनों जच्चा-बच्चा सुरक्षित हैं।
स्वास्थ्यकर्मी भी रहे असहाय
बिजली बाधित रहने के कारण ड्यूटी पर तैनात स्वास्थ्यकर्मियों को भी लाचार स्थिति का सामना करना पड़ा। सीमित संसाधनों के बीच उन्हें प्रसव की पूरी प्रक्रिया संपन्न करानी पड़ी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल में बार-बार बुनियादी सुविधाओं को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं, लेकिन व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं हो पा रहा है।
अधिकारियों ने बताई संभावित वजह
मामले में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. शिवशंकर कुमार से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी।
वहीं, स्वास्थ्य प्रबंधक रवि प्रकाश ने संभावना जताई कि रात में एमसीबी गिर जाने के कारण बिजली आपूर्ति बाधित हुई होगी। उन्होंने कहा कि तकनीशियन की कमी के कारण ऐसी समस्याओं के समाधान में दिक्कतें आती हैं।
बुनियादी सुविधाओं पर उठे सवाल
घटना के बाद गोह पीएचसी में बिजली व्यवस्था, बैकअप सिस्टम और तकनीकी संसाधनों की उपलब्धता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल में आपातकालीन सेवाओं को और मजबूत करने की जरूरत है।
स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि प्रसव कक्ष जैसे संवेदनशील स्थानों पर निर्बाध बिजली आपूर्ति और कार्यशील इमरजेंसी व्यवस्था सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक है, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने।