Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    Bihar Unique Dish: बिहार के इस डिश के आगे भूल जाएंगे पिज्जा-बर्गर! मिट्टी की हांडी में तैयार होता है खास पकवान

    Updated: Wed, 28 Jan 2026 01:06 PM (IST)

    दाउदनगर, औरंगाबाद में 'औंधा' आलू और शकरकंद से बनने वाला एक अनोखा पारंपरिक व्यंजन है। इसे मिट्टी की हांडी में उल्टा करके आग में पकाया जाता है। लोग जले ...और पढ़ें

    मिट्टी की हांडी में तैयार होता है पकवान

    मिट्टी की हांडी में तैयार होता है पकवान

    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    संवाद सहयोगी, दाउदनगर (औरंगाबाद)। औंधा शब्द सुनते ही आमतौर पर लोग चौंक जाते हैं, खासकर वे लोग जो दाउदनगर अनुमंडल मुख्यालय के बाहर के रहने वाले हैं। लेकिन दाउदनगर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में औंधा कोई अजीब शब्द नहीं, बल्कि आलू के मौसम में बनने वाला एक खास पारंपरिक व्यंजन है। यहां आलू का औंधा पूरे शौक और उत्साह के साथ लगाया और खाया जाता है।

    औंधा दरअसल खेत से निकाले गए नए आलू से तैयार किया जाने वाला विशेष पकवान है। इसमें ताजे आलू को एक घड़ा या हांडी में डालकर चारों तरफ से आग लगाकर पकाया जाता है। आग की गर्मी से आलू वाष्पीकरण के माध्यम से पकते हैं। 

    आलू के साथ शकरकंद भी डाला जाता है

    लोग जानबूझकर इसे थोड़ा अधिक पकाते हैं ताकि कुछ आलू जल जाए, क्योंकि जले हुए आलू का स्वाद और भी बेजोड़ माना जाता है। जब लोग औंधा खाने बैठते हैं तो सबसे पहले जले हुए आलू पर ही हाथ साफ करते हैं। यह तरीका इस क्षेत्र की खास पहचान है, जो अन्य जगहों पर देखने को नहीं मिलता।

    औंधा में आलू के साथ शकरकंद भी डाला जाता है, जिससे इसका स्वाद और बढ़ जाता है। कुछ मांसाहारी लोग अंडे को पुआल में लपेटकर या मिट्टी का लेप लगाकर साथ में पकाते हैं। इसके अलावा हरी मिर्च भी आग में पकाई जाती है। 

    खबरें और भी

    पकी हरी मिर्च के साथ खास नमक का इस्तेमाल

    औंधा और पकी हरी मिर्च के साथ खास नमक का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें सादा नमक के साथ काला नमक, गोलमिर्च, हिंगोली, हाजमोला या लवणभास्कर चूर्ण मिलाया जाता है। इससे स्वाद कई गुना बढ़ जाता है।

    बनाना-खाना किसी पिकनिक से कम नहीं

    औंधा लगाने की प्रक्रिया भी खास होती है। आलू और शकरकंद को धोकर पूरी तरह सुखाने के बाद हांडी में भर दिया जाता है। मुंह को पुआल से पैक कर हांडी को उल्टा कर गोइंठा या उपले पर रख दिया जाता है। चारों ओर उपले सजाकर जुट के बोरे और पुआल से ढंक कर आग लगा दी जाती है। करीब एक घंटे में औंधा तैयार हो जाता है।

    औंधा नाम इसलिए पड़ा क्योंकि हांडी को मुंह के बल उल्टा यानी औंधा करके आग में रखा जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि औंधा का स्वाद लाजवाब होता है और इसे बनाना-खाना किसी पिकनिक से कम नहीं। दो से तीन घंटे तक लोग साथ बैठकर औंधा लगाते हैं, खाते हैं और गप्पे लड़ाते हैं, जिससे आनंद के साथ स्वास्थ्य लाभ भी मिलता है।

    लाजवाब स्वाद के साथ पिकनिक का आनंद

    दीपक अग्रवाल, लव केसरी, संतोष केसरी, मुकेश जैन और कौशल कुमार कहते हैं कि खाने में औंधा का स्वाद लाजवाब होता है और इसे बनाने खाने के साथ पिकनिक का भरपूर आनंद मिल जाता है। 

    लगभग दो से तीन घंटे तक सभी लोग मिलकर औंधा लगाते हैं, खाते हैं, गप्पें लड़ाते हैं। इससे स्वास्थ्य लाभ भी मिलता है। आनंद कई गुना प्राप्त होता है।