111 साल पुराना ऐतिहासिक गोह थाना बदहाल: 1942 के आंदोलन का गवाह रहा भवन जर्जर, टपकती छत से दस्तावेजों पर खतरा
औरंगाबाद का 111 साल पुराना ऐतिहासिक गोह थाना भवन जर्जर हालत में है, जिसकी छत से बरसात में पानी टपकता है और महत्वपूर्ण दस्तावेजों को खतरा है। ...और पढ़ें

111 साल पुराना ऐतिहासिक गोह थाना बदहाल
HighLights
111 साल पुराना गोह थाना भवन जर्जर, छत टपकती।
1942 भारत छोड़ो आंदोलन का ऐतिहासिक गवाह, जीर्णोद्धार की बाट।
दस्तावेजों की सुरक्षा खतरे में, नए आधुनिक भवन की मांग।
संवाद सूत्र, उपहारा, गोह (औरंगाबाद)। ब्रिटिश शासनकाल में वर्ष 1915 में बना गोह थाना भवन आज 111 साल बाद भी बदहाल स्थिति में है। आजादी के आंदोलन का गवाह रहा यह थाना भवन अब खुद अपने जीर्णोद्धार की बाट जोह रहा है। जर्जर भवन की छत से बरसात में पानी टपकता है। ऐसे में महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेजों के भीगने का खतरा बना रहता है।
थाना परिसर में जब्त वाहनों को रखने के लिए भी पर्याप्त जगह नहीं है। थाना के मुख्य द्वार के समीप गया- दाउदनगर एनएच 120 सड़क के किनारे बड़ी वाहनों को खड़ा करना पड़ता है। जिससे सड़क पर जाम कि समस्या बनी रहती है।आए दिन दुर्घटना होने का भय बना रहता है।
क्रांतिकारियों ने थाना भवन को आग के हवाले कर दिया
थाना में चौकीदारों के रहने के लिए बना भवन भी गिर चुका है, जिसके कारण उन्हें बरामदे में रहने को मजबूर होना पड़ता है। इतिहास के पन्नों में भी गोह थाना का महत्वपूर्ण स्थान रहा है। वर्ष 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान गोह के क्रांतिकारियों ने थाना भवन को आग के हवाले कर दिया था।
इस मामले में गोह प्रखंड मुख्यालय निवासी सीताराम तिवारी, रामदेव सिंह, पुरुषोत्तम लाल अग्रवाल और अनूप दूबे को छह माह से अधिक कारावास की सजा काटनी पड़ी थी। वर्ष 1947 में देश आजाद होने के बाद सीताराम तिवारी और रामदेव सिंह को स्वतंत्रता सेनानी घोषित किया गया।
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देवकुंड, उपहारा और बंदेया थाना स्थापित
जेपी सेनानी सह गोह निवासी अरविंद पाण्डेय ने बताया कि उनके फुफेरे भाई सीताराम तिवारी ने उन्हें इस घटना की जानकारी दी थी। उन्होंने बताया कि भौगोलिक दृष्टिकोण से गोह थाना कभी काफी बड़ा क्षेत्र था। बाद में इसके भू-भाग को काटकर देवकुंड, उपहारा और बंदेया थाना स्थापित किया गया।
स्थानीय समाजसेवी प्रेमचंद तिवारी, डॉ. अशोक कुमार, विंदेश्वरी शर्मा, वंशी प्रसाद गुप्ता ने बताया कि 111 वर्ष पुराने भवन की स्थिति काफी जर्जर हो चुकी है। सरकार को इस ऐतिहासिक थाना भवन की स्थिति पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए और जल्द नए भवन का निर्माण कराया जाना चाहिए।
जर्जर भवन में काम करने में परेशानी
थानाध्यक्ष ने बताया कि जर्जर भवन में काम करने में काफी परेशानी होती है। जनता की सुनवाई के दौरान भी भवन की स्थिति को लेकर डर बना रहता है। बरसात में छत से पानी टपकने के कारण थाना में रखे दस्तावेजों की सुरक्षा की चिंता रहती है। चौकीदार का भवन गिर जाने से उन्हें बरामदे में रहना पड़ रहा है।
थाना परिसर में जब्त वाहनों को रखने में भी परेशानी होती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि आजादी के आंदोलन की स्मृतियों को समेटे इस ऐतिहासिक थाना भवन को संरक्षित करने के साथ-साथ पुलिसकर्मियों और आम लोगों की सुविधा के लिए आधुनिक थाना भवन का निर्माण की मांग की है।